श्रीगंगानगर/सूरतगढ़। समाज सेवा के क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय रहने के बाद किसी कारणवश निष्क्रिय हो चुकी संस्थाओं को दोबारा समाजहित के कार्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार विरोधी संगठन (IHRAACO) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश जालंधरा ने ऐसी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से आगे आने का आह्वान किया है, जो समाज सेवा की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन संसाधनों और आर्थिक सहयोग के अभाव में अपने कार्यों को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
दिनेश जालंधरा के अनुसार, समाज सेवा के लिए केवल इच्छा और समर्पण ही नहीं, बल्कि आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी संस्था के पास समाज के लिए काम करने का उद्देश्य, कार्यकर्ताओं की टीम और स्पष्ट योजना है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो ऐसी संस्थाओं को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “बंद पड़ी संस्थाओं को समाज सेवा हेतु आगे आना चाहिए, फंड हम देंगे।” इस पहल का उद्देश्य उन संस्थाओं को दोबारा सक्रिय करना है, जो किसी समय शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता या सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में काम करती रही हैं।
निष्क्रिय संस्थाओं को फिर सक्रिय करने की पहल
समाज में कई ऐसी संस्थाएं और सामाजिक संगठन हैं, जिन्होंने अपने स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, लेकिन समय के साथ आर्थिक, संगठनात्मक या अन्य कारणों से उनकी गतिविधियां सीमित हो गईं। कई संस्थाओं के पास अनुभव रखने वाले कार्यकर्ता और समाज के लिए उपयोगी परियोजनाओं की जानकारी मौजूद है, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पातीं।
जालंधरा का कहना है कि ऐसी संस्थाओं को केवल निष्क्रिय मानकर छोड़ देने के बजाय उन्हें दोबारा समाज सेवा के मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए संस्था की कार्ययोजना, क्षेत्र की आवश्यकता और प्रस्तावित सामाजिक गतिविधियों को समझते हुए सहयोग का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
इस पहल में शिक्षा एवं छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सेवा एवं जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, रोजगार एवं कौशल विकास, गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा, सामाजिक जागरूकता अभियान तथा पर्यावरण एवं जनहित के कार्यों को प्रमुखता देने की बात कही गई है।
शिक्षा और छात्रवृत्ति से लेकर स्वास्थ्य तक सहयोग
समाज सेवा के व्यापक दायरे को ध्यान में रखते हुए शिक्षा को महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई, छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सामग्री और कौशल विकास जैसी गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने की दिशा में संस्थाएं काम कर सकती हैं।
इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवा और जागरूकता के क्षेत्र में चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत महिलाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
रोजगार एवं कौशल विकास भी इस पहल का एक अहम हिस्सा हो सकता है। युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, उनके कौशल को विकसित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचेगी मदद
समाज सेवा की सबसे बड़ी आवश्यकता उन परिवारों के लिए होती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करते हैं। ऐसी स्थिति में सामाजिक संस्थाएं जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने का काम कर सकती हैं।
दिनेश जालंधरा ने कहा कि किसी भी संस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका उद्देश्य, कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी होती है। यदि संस्था के पास स्पष्ट उद्देश्य है और वह पारदर्शी तरीके से काम करने के लिए तैयार है, तो संसाधनों की कमी उसके सामाजिक कार्यों में स्थायी बाधा नहीं बननी चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जोर
सामाजिक संस्थाओं को सहयोग उपलब्ध कराने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। किसी भी संस्था को मिलने वाले सहयोग का उपयोग निर्धारित सामाजिक उद्देश्य के लिए किया जाना जरूरी है। इसके लिए परियोजना की स्पष्ट कार्ययोजना, लाभार्थियों का विवरण, खर्च का रिकॉर्ड और कार्यों की जानकारी व्यवस्थित रूप से रखे जाने की आवश्यकता होगी।
जालंधरा ने कहा कि फंड दिया जाएगा, लेकिन उसका उपयोग समाजहित के निर्धारित उद्देश्य के लिए होना चाहिए। इससे सहयोग देने वाले लोगों और संस्थाओं का विश्वास मजबूत होगा और वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने में भी आसानी होगी।
हर जिले में मजबूत सामाजिक नेटवर्क बनाने का लक्ष्य
इस पहल का एक उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। यदि किसी जिले में कई संस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं, तो उनके बीच सहयोग और संसाधनों का बेहतर उपयोग करके बड़े स्तर पर सामाजिक अभियान चलाए जा सकते हैं।
जालंधरा ने सुझाव दिया कि संस्थाओं को एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय सहयोग, समन्वय और साझेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इससे सीमित संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा और समाज के अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
उनके अनुसार, यदि प्रत्येक जिले में मजबूत सामाजिक नेटवर्क तैयार हो जाए तो स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर ही प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।
युवाओं और महिलाओं को जोड़ने पर विशेष जोर
समाज सेवा को नई दिशा देने के लिए युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। युवाओं को सामाजिक कार्यों से जोड़ने के लिए कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और स्वयंसेवी गतिविधियों का सहारा लिया जा सकता है।
महिलाओं को भी सामाजिक नेतृत्व और सेवा कार्यों में अधिक अवसर देने की आवश्यकता है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि परिवार और समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर जमीनी स्तर पर बेहतर काम किया जा सकेगा।
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में नई पीढ़ी की भागीदारी से संस्थाओं को तकनीक, डिजिटल संचार और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों का लाभ भी मिल सकता है।
संस्थाओं से सीधे आगे आने की अपील
दिनेश जालंधरा ने उन सभी संस्थाओं से आगे आने की अपील की है, जो कभी सक्रिय थीं लेकिन वर्तमान समय में संसाधनों की कमी या अन्य कारणों से काम नहीं कर पा रही हैं। उनका कहना है कि यदि किसी संस्था में समाज के लिए काम करने की इच्छा अभी भी जीवित है, तो उसे दोबारा सक्रिय किया जा सकता है।
उन्होंने संस्थाओं से अपने सामाजिक कार्यों का स्पष्ट प्रस्ताव तैयार करने, स्थानीय जरूरतों की पहचान करने और पारदर्शी कार्ययोजना के साथ आगे आने का आह्वान किया। ऐसी योजनाओं के आधार पर सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
समाज सेवा को आंदोलन का रूप देने की कोशिश
इस पहल के पीछे मूल विचार यह है कि समाज सेवा किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। जब अलग-अलग संस्थाएं, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं और सक्षम लोग एक साझा उद्देश्य के साथ काम करते हैं, तब सामाजिक बदलाव की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।
निष्क्रिय संस्थाओं को दोबारा सक्रिय करना इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह पहल प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं।
दिनेश जालंधरा ने सेवा भावना को इस पूरी पहल का आधार बताते हुए कहा कि संसाधनों की व्यवस्था में सहयोग किया जा सकता है, लेकिन समाज के लिए काम करने की इच्छा और प्रतिबद्धता संस्था के भीतर से आनी चाहिए।
इस संदेश के साथ उन्होंने सामाजिक संगठनों को निष्क्रियता छोड़कर दोबारा मैदान में उतरने और समाजहित में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया है। सेवा, सहयोग, संगठन, पारदर्शिता और समाज विकास को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की यह पहल आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं के लिए एक नया अवसर बन सकती है।