बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद जहां नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ लेकर सरकार की नई टीम को आकार दिया, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आने लगा है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज कुछ विधायकों ने विरोध का रास्ता अपनाया है। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर है और यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो उसका इस्तीफा कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लिया जाएगा।
कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की। विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से 20 मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई ऐसे विधायक भी रहे जिन्हें मंत्री बनने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिला। इसी कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दिया।
कैबिनेट में स्थान न मिलने से नाराज दो विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। इनमें विजयपुरा जिले की इंडी विधानसभा सीट के विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल और शिवमोग्गा जिले की सागर सीट के विधायक बेलूर गोपालकृष्ण शामिल हैं। उनके कदम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भी इसी तरह का निर्णय ले सकते हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि पार्टी की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजनीति में असहमति और इस्तीफे नई बात नहीं हैं, लेकिन जो लोग पार्टी के साथ अपना भविष्य देखते हैं, उन्हें धैर्य बनाए रखना चाहिए। उनके अनुसार संगठन मजबूत रहेगा तो हर कार्यकर्ता और नेता को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने नाराज विधायकों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न बोर्डों, निगमों और अन्य संस्थाओं में अभी कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं। इन पदों पर जल्द नियुक्तियां की जाएंगी और योग्य नेताओं को जिम्मेदारी देने पर विचार होगा। उन्होंने संकेत दिया कि जिन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी, उनके लिए भविष्य में अन्य अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
डीके शिवकुमार ने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए धैर्य और संगठन के प्रति निष्ठा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक करियर में भी ऐसा समय आया जब उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्रियों धर्म सिंह और सिद्धारमैया के कार्यकाल में मंत्री बनने का अवसर नहीं मिला था। इसके बावजूद उन्होंने कभी पार्टी छोड़ने या इस्तीफा देने का विचार नहीं किया और संगठन के साथ जुड़े रहे।
उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का उदाहरण भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल के समय भी कई बड़े नेता, जिनमें मल्लिकार्जुन खरगे और धर्म सिंह जैसे नाम शामिल थे, मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बन पाए थे। बावजूद इसके उन्होंने संगठन में बने रहकर काम किया और बाद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। शिवकुमार ने कहा कि राजनीति में धैर्य और अनुशासन ही लंबे समय तक सफलता की कुंजी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देने का निर्णय लेता है तो सरकार या पार्टी उसे रोकने का प्रयास नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस्तीफा देना किसी का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन पार्टी ऐसे मामलों में अनिश्चितता नहीं रखेगी और आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी।
कैबिनेट विस्तार के बाद असंतोष किसी भी दल में सामान्य स्थिति होती है, लेकिन नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती नाराज नेताओं को साथ बनाए रखना होती है। कांग्रेस नेतृत्व अब संगठनात्मक नियुक्तियों और राजनीतिक संवाद के जरिए असंतुष्ट नेताओं को संतुष्ट करने की कोशिश करेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने सख्त और स्पष्ट संदेश से यह संकेत दे दिया है कि सरकार और संगठन अनुशासन के मुद्दे पर कोई समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं।