अयोध्या : अयोध्या में सेना के लिए आरक्षित जमीन को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने भूमि उपयोग, डिनोटिफिकेशन और बड़े नामों से जुड़ी जमीन खरीद को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दावा किया गया है कि राम मंदिर क्षेत्र से कुछ किलोमीटर दूर स्थित माझा जमथरा इलाके में सेना के लिए आरक्षित और बफर जोन से जुड़ी जमीन को बाद में डिनोटिफाई किया गया। रिपोर्ट में अडानी समूह, बाबा रामदेव से जुड़े लोगों और श्रीश्री रविशंकर की संस्था से जुड़ी जमीन खरीद का भी उल्लेख है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इस मामले को समझते समय एक महत्वपूर्ण अंतर रखना जरूरी है। 13,351 एकड़ पूरी जमीन सीधे अडानी, बाबा रामदेव और श्रीश्री रविशंकर के नाम हस्तांतरित होने का दावा स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा खरीदी गई निजी जमीन तथा उसके आसपास की अधिसूचित भूमि के डिनोटिफिकेशन का विवरण मिलता है।
माझा जमथरा की जमीन का मामला
अयोध्या के राम मंदिर से लगभग 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माझा जमथरा गांव में जमीन की खरीद को लेकर अगस्त 2024 में रिपोर्टें सामने आई थीं। इनमें आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए बताया गया कि कुछ जमीनें सेना के फील्ड फायरिंग और प्रशिक्षण क्षेत्र से जुड़े बफर जोन के आसपास थीं।
मामले में सबसे अधिक चर्चा इस बात की हुई कि जिन क्षेत्रों में कुछ निजी जमीनों की खरीद हुई, उनके आसपास की अधिसूचित भूमि को बाद में डिनोटिफाई किया गया। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, माझा जमथरा क्षेत्र की 894.7 हेक्टेयर जमीन को डिनोटिफाई किए जाने की बात सामने आई थी। यह कार्रवाई 30 मई 2024 की अधिसूचना से जुड़ी बताई गई।
अडानी समूह से जुड़ी जमीन खरीद का उल्लेख
रिपोर्टों में अडानी समूह की सहयोगी कंपनी होमक्वेस्ट इंफ्रास्पेस द्वारा माझा जमथरा में लगभग 1.4 हेक्टेयर जमीन खरीदे जाने का उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक यह जमीन नवंबर 2023 में एक पूर्व भाजपा विधायक से जुड़ी फर्म से खरीदी गई थी। रिपोर्टों के अनुसार संबंधित फर्म ने इससे पहले यह जमीन अयोध्या के एक निवासी से खरीदी थी।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी कंपनी द्वारा निजी जमीन खरीदना और सेना की आरक्षित जमीन का उसी कंपनी के नाम हो जाना दो अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग इन दोनों घटनाओं को अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत करती है।
श्रीश्री रविशंकर की संस्था का भी जिक्र
मामले में श्रीश्री रविशंकर से जुड़ी आर्ट ऑफ लिविंग संस्था का नाम भी सामने आया। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार संस्था ने फरवरी 2022 में माझा जमथरा क्षेत्र में लगभग 5.31 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। इसी तरह बाबा रामदेव से जुड़े कुछ लोगों द्वारा भी इस क्षेत्र में जमीन खरीद का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार हरियाणा योग आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जयदीप आर्य, राकेश मित्तल समेत कुछ लोगों ने भी इस क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। इन लोगों के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से संबंध बताए गए थे।
डिनोटिफिकेशन को लेकर प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से दिया गया पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अयोध्या के तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने माझा जमथरा क्षेत्र के डिनोटिफिकेशन की पुष्टि की थी। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि यह क्षेत्र अयोध्या के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां विकास संबंधी योजनाओं पर विचार किया जा रहा है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि डिनोटिफिकेशन का निर्णय उन व्यक्तियों या संस्थाओं से संबंधित नहीं था, जिन्होंने पहले वहां जमीन खरीदी थी। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में मंदिर और संग्रहालय जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया था।
13,351 एकड़ के दावे को समझना जरूरी
अखबार की कटिंग में 13,351 एकड़ जमीन को सेना के लिए आरक्षित बताए जाने और बाद में अडानी, रामदेव तथा रविशंकर के नाम होने का दावा प्रमुखता से किया गया है। लेकिन उपलब्ध अन्य रिपोर्टों में सामने आए आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। इसलिए 13,351 एकड़ पूरी भूमि का सीधे इन नामों पर हस्तांतरण हुआ, ऐसा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतों के आधार पर बिना अतिरिक्त सरकारी दस्तावेजों के निकालना उचित नहीं होगा।
जमीन से जुड़े मामलों में अधिसूचना, निजी स्वामित्व, बिक्री, नामांतरण और डिनोटिफिकेशन अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं। किसी क्षेत्र का बफर जोन या अधिसूचित क्षेत्र होना यह जरूरी नहीं बनाता कि वहां की प्रत्येक जमीन सरकारी स्वामित्व में ही हो।
अयोध्या में तेजी से बदल रहा भू-दृश्य
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में बुनियादी ढांचे और पर्यटन से जुड़े विकास ने जमीन की मांग और कीमतों को लेकर भी व्यापक चर्चा पैदा की है। ऐसे में सेना से जुड़े आरक्षित क्षेत्रों के आसपास भूमि उपयोग में बदलाव का मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस मामले में आगे की तस्वीर सरकारी अधिसूचनाओं, राजस्व अभिलेखों और संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व दस्तावेजों से अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि माझा जमथरा क्षेत्र में भूमि खरीद और बाद में डिनोटिफिकेशन को लेकर सार्वजनिक चर्चा हुई थी। लेकिन 13,351 एकड़ सेना की पूरी आरक्षित जमीन सीधे तीनों चर्चित नामों के हवाले किए जाने के दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
नोट: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और उपलब्ध अखबारी सामग्री के आधार पर स्वतंत्र भाषा और नए संपादकीय ढांचे में तैयार किया गया है। प्रकाशन से पहले संपादकीय संस्था को मूल सरकारी दस्तावेजों और संबंधित भूमि रिकॉर्ड से तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।