रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को शत्रु संपत्ति से जुड़े तीन मुकदमों को एक साथ चलाने की मांग के मामले में झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले निचली अदालत भी इसी मांग को अस्वीकार कर चुकी थी। इसके बाद आजम खान की ओर से सेशन कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब तीनों मामलों की सुनवाई अलग-अलग किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान आजम खान के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि तीनों मुकदमों में विवादित संपत्ति एक ही है। इसके अलावा, ज्यादातर आरोपित और संबंधित दस्तावेज भी समान हैं। ऐसे में तीनों मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जानी चाहिए, ताकि एक ही संपत्ति और उससे जुड़े तथ्यों पर अलग-अलग मुकदमों में सुनवाई करने की जरूरत न पड़े। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस मांग का विरोध किया।
अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि तीनों मामले अलग-अलग दस्तावेजों, स्थानों और समय से जुड़े कथित अपराधों पर आधारित हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक मामले में अभिलेखों में कथित कूटरचना से संबंधित परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए तीनों मामलों की सुनवाई अलग-अलग की जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सेशन कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इस पूरे मामले की शुरुआत शत्रु संपत्ति से जुड़े राजस्व अभिलेखों में कथित गड़बड़ी की जांच से हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से 9 मई 2020 को रामपुर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
शुरुआत में लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बाद की जांच में आजम खान, उनकी पत्नी एवं पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा, बेटे अब्दुल्ला आजम और जौहर ट्रस्ट से जुड़े अन्य सदस्यों के नाम भी आरोपितों में शामिल किए गए। विवादित जमीन आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास स्थित बताई जाती है। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, यह संपत्ति इमामुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी, जो विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे।
वर्ष 2006 में इस जमीन को शत्रु संपत्ति के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। शत्रु संपत्ति से आशय ऐसी संपत्ति से है, जिसे संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सरकार के नियंत्रण में रखा जाता है। इस मामले में आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करके जमीन से संबंधित प्रविष्टियों को बदलने की कोशिश की गई थी। जांच के दौरान रिकॉर्ड के कुछ पन्नों के फटे होने और दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं की बात भी सामने आई थी। मामले में सेवानिवृत्त कलेक्ट्रेट कर्मचारी भगवंत भी आरोपित हैं। बताया गया है कि वह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने आगे की विवेचना की और आजम खान के खिलाफ कुछ अतिरिक्त धाराएं जोड़ते हुए पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, इन मामलों में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
शत्रु संपत्ति से जुड़े अन्य दो मुकदमे वर्ष 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने और शहर कोतवाली में दर्ज किए गए थे। आजम खान की ओर से इन तीनों मामलों को एक साथ चलाने की मांग की गई थी, लेकिन निचली अदालत के बाद अब सेशन कोर्ट ने भी इसे स्वीकार नहीं किया। ताजा फैसले से मुकदमों की अलग-अलग सुनवाई जारी रहने की संभावना है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालतों के आगामी आदेश महत्वपूर्ण होंगे।