बरेली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रहरियों की भूमिका, प्रदेश की कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गांवों में सुरक्षा मजबूत करने, अपराधों पर नियंत्रण रखने और पुलिस तथा जनता के बीच समन्वय बढ़ाने में ग्राम प्रहरियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों के सम्मान पर जोर दिया गया। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम प्रहरियों को सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों को गांव की सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी बताते हुए कहा कि उनकी सतर्कता से स्थानीय स्तर पर होने वाली गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में मदद मिलती है। उन्होंने ग्राम प्रहरियों की भूमिका की तुलना शहरों में लगे सीसीटीवी कैमरों से करते हुए कहा कि जिस तरह कैमरे शहरी क्षेत्रों में निगरानी का माध्यम बनते हैं, उसी तरह सजग ग्राम प्रहरी गांवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके मुताबिक, ग्राम प्रहरी जागरूक और सक्रिय रहेंगे तो गांवों में सुरक्षा का वातावरण बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी बात रखी। इस पहल का उद्देश्य ग्राम प्रहरियों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के समय आर्थिक राहत देना है। हालांकि, इस सुविधा को लेकर पात्रता, लागू होने की तारीख और विस्तृत नियमों की जानकारी संबंधित सरकारी घोषणा के आधार पर स्पष्ट होगी। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए ग्राम प्रहरियों को मुख्यमंत्री ने बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में त्योहारों के दौरान सुरक्षा के माहौल में बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि पहले त्योहारों के समय उपद्रव की घटनाएं सामने आती थीं, जबकि अब लोग अधिक निडर होकर घरों से निकलते हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट था, लेकिन अब राज्य की स्थिति बदल रही है। ये बातें मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार के रुख और उपलब्धियों के संदर्भ में कहीं।
बरेली में शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा को किसी भी समाज, प्रदेश और देश की बुनियादी पहचान बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी अपनी शिक्षा व्यवस्था के कारण देश में अग्रणी स्थान रखता था, लेकिन आजादी के बाद समय के साथ शिक्षा को सरकारी प्राथमिकताओं में अपेक्षित महत्व नहीं मिला। उनके अनुसार, शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा का प्रभाव केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ा।
मुख्यमंत्री ने उन शिक्षकों की सराहना की जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए काम जारी रखा। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने शिक्षा की ज्योति को बुझने नहीं दिया और प्रदेश को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। उनके संबोधन में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और शिक्षकों की भूमिका को महत्व देने का संदेश प्रमुख रहा।

बरेली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्राम सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था दोनों विषय चर्चा में रहे। एक ओर ग्राम प्रहरियों को सम्मानित कर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस-जनसहयोग को मजबूत करने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर शिक्षा को प्रदेश के विकास का आधार बताया गया। मुख्यमंत्री के संबोधन में सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और शिक्षा को उत्तर प्रदेश की प्रगति से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। ग्राम प्रहरियों के लिए प्रस्तावित स्वास्थ्य सुविधा और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर अब संबंधित सरकारी घोषणाओं और क्रियान्वयन की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।