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आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को बाहर करना असंवैधानिक: हाई कोर्ट

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अधिक अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को केवल आरक्षित वर्ग की कटऑफ के आधार पर मुख्य परीक्षा से बाहर करना संविधान के समानता अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि यदि […]

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  • May 22, 2026 11:18 am IST, Published 11 hours ago

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अधिक अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को केवल आरक्षित वर्ग की कटऑफ के आधार पर मुख्य परीक्षा से बाहर करना संविधान के समानता अधिकार का उल्लंघन है।

अदालत ने कहा कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त करता है, फिर भी उसे सिर्फ इस वजह से मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किया जाता कि वह आरक्षित वर्ग की निर्धारित कटऑफ तक नहीं पहुंच सका, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16(1) के खिलाफ माना जाएगा।

न्यायालय ने इस मामले में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा विज्ञापन की संबंधित शर्त और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन मानकों को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। अदालत के इस फैसले को समान अवसर और मेरिट के सिद्धांत के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

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