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गाजियाबाद में पोलियो वायरस की दस्तक से बढ़ी सतर्कता, 107 टीमें घर-घर कर रहीं बच्चों की निगरानी

गाजियाबाद: डूंडाहेड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पानी के नमूनों में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस (VDPV) टाइप-1 मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य संचारी रोग विभाग की विशेष टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है और संवेदनशील इलाकों में व्यापक निगरानी […]

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  • June 11, 2026 11:01 am IST, Published 2 hours ago

गाजियाबाद: डूंडाहेड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पानी के नमूनों में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस (VDPV) टाइप-1 मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य संचारी रोग विभाग की विशेष टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है और संवेदनशील इलाकों में व्यापक निगरानी अभियान शुरू कर दिया गया है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, वायरस की पुष्टि के बाद राजनगर, शास्त्रीनगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्ठा, मिर्जापुर, विजयनगर तथा खैराती नगर समेत कई क्षेत्रों को विशेष निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है। इन इलाकों में पांच वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति का पता लगाने के लिए 107 सर्वेक्षण टीमें तैनात की गई हैं।

टीमें घर-घर जाकर बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी बच्चा नियमित टीकाकरण से वंचित न रहे। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से ऐसे बच्चों की पहचान कर रहा है, जिनका टीकाकरण अधूरा है या जिन्होंने पोलियो की खुराक नहीं ली है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन चंद वैश्य ने बताया कि राज्य स्तर से पहुंचे विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ मिलकर जिले में निगरानी और रोकथाम की रणनीति पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और किसी भी संदिग्ध मामले की तत्काल सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस (VDPV) सामान्य पोलियो वायरस से अलग होता है। मौखिक पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) में कमजोर किया गया वायरस होता है, जो शरीर में प्रतिरक्षा विकसित करता है। लेकिन यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक टीकाकरण का स्तर कम बना रहे तो यही कमजोर वायरस समुदाय में फैलते हुए आनुवंशिक बदलाव के कारण अधिक सक्रिय रूप धारण कर सकता है।

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ परिस्थितियों में यह वायरस भी लकवे जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण कवरेज बढ़ाने और निगरानी मजबूत करने पर विशेष जोर दे रहा है।

पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराता है। हाल ही में डूंडाहेड़ा एसटीपी से भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट में वीडीपीवी टाइप-1 की पुष्टि हुई, जिसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चों को पोलियो समेत सभी नियमित टीके समय पर लगें। पोलियो के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा पूर्ण टीकाकरण ही है। यदि किसी बच्चे की टीकाकरण स्थिति स्पष्ट नहीं है तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर आवश्यक खुराक दिलानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय रहते निगरानी, सर्वेक्षण और टीकाकरण अभियान को मजबूत कर किसी भी संभावित संक्रमण के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

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