नयी दिल्ली: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) और उत्तर प्रदेश फार्माकोपिया परिषद (UPPPC) ने रणनीतिक साझेदारी की है। दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का उद्देश्य दवा उद्योग, मेडिकल डिवाइस निर्माण, नियामक व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यह समझौता ग्रेटर नोएडा में आयोजित YEIDA MedTech Investors Meet & Site Visit 2026 के दौरान किया गया।
इस साझेदारी के जरिए उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल और मेडिकल टेक्नोलॉजी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। समझौते के तहत गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने, उद्योगों में नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रहेगा।
दोनों संस्थाएं मिलकर दवा और चिकित्सा उपकरण उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े मानकों को मजबूत करेंगी। साथ ही भारतीय औषध संहिता, औषध सतर्कता (Pharmacovigilance) और मेडिकल डिवाइस से जुड़ी सुरक्षा प्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और अभियान आयोजित किए जाएंगे।
एमओयू का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को डिजिटल रिपोर्टिंग टूल उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे किसी दवा या मेडिकल डिवाइस से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग आसान होगी। इससे उत्पादों की गुणवत्ता पर निगरानी और मरीजों की सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
इस साझेदारी के तहत अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर नई तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य उत्पादों के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना सकेगा।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग का कहना है कि यह पहल केवल नियामकीय प्रक्रियाओं को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना भी है। बाजार में उपलब्ध दवाओं और मेडिकल डिवाइस की गुणवत्ता की निगरानी के साथ-साथ उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाना भी इस पहल का अहम लक्ष्य है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में यह समझौता भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।