ऊना (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से पशु चिकित्सा क्षेत्र का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां नौ माह की गर्भवती भैंस के पेट से सफल सर्जरी के दौरान लोहे और धातु के कुल 66 टुकड़े निकाले गए। इनमें लोहे की कीलें, तार, धातु के नुकीले टुकड़े और अन्य धातु सामग्री शामिल थी। समय रहते ऑपरेशन किए जाने से न केवल भैंस की जान बच गई, बल्कि उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने पशुपालकों और पशु चिकित्सकों के बीच पशुओं के चारे की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
10 दिनों से नहीं खा रही थी चारा
जानकारी के अनुसार, ऊना जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले पशुपालक ने अपनी गर्भवती भैंस के लगातार बीमार रहने पर पशु चिकित्सालय का रुख किया। भैंस पिछले करीब 10 दिनों से चारा नहीं खा रही थी। इसके अलावा वह काफी सुस्त हो गई थी और पेट में असामान्य दर्द के संकेत दे रही थी। पशुपालक ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन जब हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उसे विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों के पास ले जाया गया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
पशु चिकित्सकों ने भैंस की विस्तृत जांच की। चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच के दौरान पता चला कि उसके पेट में बड़ी मात्रा में धातु की वस्तुएं मौजूद हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन करने का निर्णय लिया क्योंकि धातु के नुकीले टुकड़े कभी भी भैंस के आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऑपरेशन में देरी होती तो स्थिति जानलेवा बन सकती थी और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
सफल ऑपरेशन में निकले 66 धातु के टुकड़े
वेटरनरी विशेषज्ञों की टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन किया। कई घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान भैंस के पेट से कुल 66 धातु के टुकड़े निकाले गए। इनमें कीलें, लोहे के तार, नुकीले धातु के टुकड़े और अन्य धातु सामग्री शामिल थी।
डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और फिलहाल भैंस की हालत स्थिर है। उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और आवश्यक दवाएं एवं पोषण दिया जा रहा है।
कैसे पहुंच जाती हैं धातु की चीजें पशुओं के पेट में?
विशेषज्ञों के अनुसार, खुले में चरने वाले पशु कई बार चारे के साथ अनजाने में लोहे की कीलें, तार, स्क्रैप या अन्य धातु सामग्री निगल लेते हैं। खेतों, निर्माण स्थलों या कूड़े-कचरे के आसपास बिखरी ऐसी वस्तुएं पशुओं के लिए बेहद खतरनाक साबित होती हैं।
पशु चारा खाते समय धातु की इन वस्तुओं को पहचान नहीं पाते और वे सीधे पेट में पहुंच जाती हैं। समय के साथ ये वस्तुएं पेट और अन्य आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती हैं।
गर्भवती पशुओं के लिए अधिक खतरनाक
पशु चिकित्सकों का कहना है कि गर्भवती पशुओं में ऐसी स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। यदि नुकीली धातु गर्भाशय या अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा दे तो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और सर्जरी ही सबसे प्रभावी उपचार होता है।
पशुपालकों को दी गई महत्वपूर्ण सलाह
विशेषज्ञों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशुओं को स्वच्छ और सुरक्षित चारा उपलब्ध कराएं। चारा डालने से पहले उसमें किसी भी प्रकार की धातु या कचरे की जांच अवश्य करें। यदि कोई पशु अचानक खाना बंद कर दे, बार-बार पेट दर्द के संकेत दे या सुस्त दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
इसके अलावा खेतों और पशुशालाओं के आसपास कील, तार और धातु का कबाड़ खुला न छोड़ने की भी सलाह दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
फिलहाल खतरे से बाहर है भैंस
डॉक्टरों के अनुसार सफल सर्जरी के बाद भैंस तेजी से स्वस्थ हो रही है। उसकी नियमित निगरानी की जा रही है और गर्भ में पल रहा बच्चा भी सुरक्षित बताया जा रहा है। पशुपालक ने चिकित्सकों की टीम का आभार जताते हुए कहा कि समय पर इलाज मिलने से उसकी कीमती भैंस और उसके बच्चे की जान बच गई।
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि पशुओं के खान-पान और उनके आसपास के वातावरण की स्वच्छता कितनी महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के लिए गंभीर और जानलेवा साबित हो सकती है।