राम मंदिर पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, बिंदल ने साधा निशाना

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जो नेता पहले राम मंदिर और रामलला के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वही आज […]

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  • July 9, 2026 3:08 pm IST, Published 1 hour ago

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जो नेता पहले राम मंदिर और रामलला के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वही आज राजनीतिक लाभ के लिए मंदिरों में जाकर अपनी आस्था प्रदर्शित कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस की इस कथित बदलती राजनीतिक रणनीति को जनता के सामने दोहरे चरित्र का उदाहरण बताया।

भाजपा हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा गया कि वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले नेता अब स्वयं को भगवान राम का भक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं। पोस्ट में दावा किया गया कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा तुष्टिकरण पर आधारित रही है, लेकिन अब जनता के बदलते रुख को देखते हुए पार्टी अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रही है।

डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेताओं ने रामलला के अस्तित्व तक पर सवाल खड़े किए थे। अब वही नेता चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए मंदिरों में जाकर दर्शन कर रहे हैं और स्वयं को धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और राजनीतिक दलों के कथन एवं आचरण के बीच अंतर को अच्छी तरह समझती है। भाजपा का दावा है कि देश की जनता वास्तविक आस्था और चुनावी अवसरवाद के बीच का अंतर पहचान चुकी है। यही कारण है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर जनता का विश्वास भाजपा के साथ लगातार मजबूत हुआ है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एक पुराने बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली में यह दावा किया था कि 97 प्रतिशत हिंदू आबादी वाले राज्य में हिंदू विचारधारा को हराकर जीत हासिल की गई है। भाजपा का आरोप है कि अब वही लोग राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार राम मंदिर के दर्शन करने निकल पड़े हैं। भाजपा इसे विचारधारा और व्यवहार के बीच विरोधाभास का उदाहरण बता रही है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। पार्टी का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्षों से लंबित इस मुद्दे का समाधान हुआ और देशवासियों की भावनाओं का सम्मान किया गया। भाजपा का मानना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह कहती रही है कि उसकी राजनीति संविधान, सामाजिक सद्भाव और सभी धर्मों के सम्मान पर आधारित है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है, जबकि कांग्रेस विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के मुद्दों पर राजनीति करने में विश्वास रखती है। हालांकि इस मामले में भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित कांग्रेस नेताओं की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय रहा है। चुनावी मौसम के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते हैं। विभिन्न दल अपने-अपने दृष्टिकोण से जनता के बीच संदेश देने का प्रयास करते हैं। ऐसे में नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक बहस को और तेज कर देते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक संदेश बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं। राजनीतिक दल अपने समर्थकों तक विचार पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। इससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यापक स्तर पर सामने आते हैं।

हिमाचल प्रदेश में भी आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। दोनों दल अपने-अपने मुद्दों और उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा जहां सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता दे रही है, वहीं कांग्रेस जनकल्याण, महंगाई, बेरोजगारी और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बता रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकार के बयान और आरोप-प्रत्यारोप और अधिक देखने को मिल सकते हैं। हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और अंतिम निर्णय जनता ही अपने मताधिकार के माध्यम से करती है।

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