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UP-बिहार के लिए गेमचेंजर बनेगा गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट एक्सप्रेसवे

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश और बिहार की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-31) तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। करीब 132.76 किलोमीटर लंबा यह चार लेन एक्सप्रेसवे भविष्य में छह से आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। लगभग 5,300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह […]

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  • July 18, 2026 1:12 pm IST, Published 34 minutes ago

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश और बिहार की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-31) तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। करीब 132.76 किलोमीटर लंबा यह चार लेन एक्सप्रेसवे भविष्य में छह से आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। लगभग 5,300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर भारत और पूर्वी भारत को जोड़ने वाला रणनीतिक परिवहन गलियारा बनने जा रहा है।

एक्सप्रेसवे का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है और कई हिस्से अंतिम चरण में हैं। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

यह एक्सप्रेसवे गाजीपुर से शुरू होकर बलिया के रास्ते घाघरा नदी पार करते हुए बिहार के मांझीघाट और आगे छपरा, पटना तथा हाजीपुर की ओर कनेक्टिविटी देगा। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मार्ग पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे वाहन सीधे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और आगे दिल्ली-एनसीआर तक बिना रुकावट पहुंच सकेंगे। इस नेटवर्क के बनने से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार पहली बार देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से सीधे जुड़ जाएंगे।

परियोजना के साथ 35 किलोमीटर लंबा बलिया लिंक एक्सप्रेसवे भी तैयार किया जा रहा है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को सीधे NH-31 से जोड़ेगा। इसके अलावा करीब 17 किलोमीटर का बक्सर लिंक रोड बिहार के बक्सर जिले तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराएगा। भविष्य में यह मार्ग बक्सर-पटना-भागलपुर एक्सप्रेसवे और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ेगा।

यात्रा का समय होगा काफी कम

एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

  • बलिया से पटना लगभग 1.5 घंटे
  • बलिया से छपरा करीब 1 घंटा
  • पूर्वांचल से दिल्ली-NCR तक पूरी तरह एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए तेज सफर
  • बिहार से बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक निर्बाध कनेक्टिविटी

इस परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहेगा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और आगे गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगा। इससे मेरठ, प्रयागराज, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ, गाजीपुर, बलिया और बिहार के कई शहर एक बड़े हाईस्पीड सड़क नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे।

एक्सप्रेसवे बनने के बाद बलिया, गाजीपुर और आसपास के जिलों के किसानों को अपनी उपज बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में कम समय और कम लागत लगेगी। फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद जल्दी बाजार तक पहुंच सकेंगे।

साथ ही एक्सप्रेसवे के किनारे वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट विकसित होने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा भारी वाहनों का दबाव शहरों के भीतर से हटकर एक्सप्रेसवे पर स्थानांतरित होगा। इससे बलिया और आसपास के कस्बों में जाम कम होगा, यात्रा सुरक्षित बनेगी और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।

परियोजना का लगभग 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। गाजीपुर से शाहपुर तक का हिस्सा तैयार बताया जा रहा है, जबकि करीमुद्दीनपुर के पास रेलवे ओवरब्रिज और घाघरा नदी पर नए पुल का निर्माण तेजी से जारी है। शेष कार्य पूरा होने के बाद एक्सप्रेसवे को चरणबद्ध तरीके से यातायात के लिए खोला जा सकता है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक संपर्क को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में देखी जा रही है।

 

 

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