लखनऊ/नई दिल्ली : विश्व हिंदी परिषद की जापान शाखा के अध्यक्ष पद पर टोक्यो निवासी प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा को मनोनीत किया गया है। परिषद के महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने नियुक्ति पत्र जारी कर आशा जताई कि उनके नेतृत्व में जापान में हिंदी शिक्षण, भारतीय संस्कृति और साहित्यिक आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।
डॉ. शर्मा जापान से ‘हिंदी की गूँज’ व ‘हीमावारी’ जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं का संपादन करती हैं। उनकी 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें _गोपू और सुनहरी मछली, मेरा भारत महान, जापान का सनातन धर्म शिंतो, दालान की धूप_ प्रमुख हैं। 38 साझा संकलनों व 15 से अधिक संपादित पुस्तकों के साथ वे कविता, कहानी, हाइकु, नाटक, उपन्यास, संस्मरण सभी विधाओं में सिद्धहस्त हैं। हिंदी व पंजाबी के साथ-साथ वे किन्नर समाज के उत्थान के लिए विशेष रूप से कार्यरत हैं। जापान में भारतीय संस्कृति व भोजन के प्रचार हेतु वे कई जापानी दूरदर्शन चैनलों पर आमंत्रित होती रही हैं। सुनामी पीड़ितों की सेवा के लिए जापान सरकार ने उन्हें सम्मानित किया। उन्हें विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, बर्मिंघम स्थित भारतीय दूतावास, बैंकाक, दोहा, लंदन में सम्मान मिला है। वे दो बार विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुकी हैं। रविंद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर सहित देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों व संस्थानों ने उन्हें सम्मानित किया है। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर सेवारत हैं।
इस मनोनयन पर परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. डी. पी. मिश्रा, राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह, सहित पत्रकारों, साहित्यकारों व समाजसेवियों ने हर्ष व्यक्त किया है। डॉ. साह ने कहा कि डॉ. शर्मा का अनुभव और समर्पण जापान में हिंदी को नए शिखर पर ले जाएगा। विश्व हिंदी परिषद हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने हेतु सतत प्रयासरत है। जापान शाखा का यह गठन उसी दिशा में बड़ा कदम है।