नई दिल्ली : दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार होटल कर्मचारी और कुक केशव ने पूछताछ के दौरान जो जानकारी दी है, उसने जांच एजेंसियों को कई नए सवालों के जवाब तलाशने पर मजबूर कर दिया है। कुक केशव का दावा है कि होटल की रसोई में मौजूद इलेक्ट्रिक स्टोव अचानक बम की तरह फट गया था, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। लेकिन सबसे गंभीर सवाल उसके द्वारा होटल की मुख्य बिजली आपूर्ति बंद किए जाने को लेकर उठ रहा है।
पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, होटल में आग लगने के बाद जो घटनाक्रम सामने आया है, वह हादसे की गंभीरता को और बढ़ा देता है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रसोई में हुए विस्फोट के बाद पूरे होटल में धुआं फैलने लगा। इसी दौरान कुक केशव ने मुख्य बिजली आपूर्ति बंद कर दी और वहां से बाहर निकल गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह फैसला होटल में मौजूद लोगों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता था।
पूछताछ में केशव ने बताया कि बुधवार सुबह वह सामान्य दिनों की तरह रसोई में काम कर रहा था। उसने इलेक्ट्रिक स्टोव चालू किया, लेकिन कुछ ही देर बाद जोरदार धमाका हुआ। उसके अनुसार धमाका इतना तेज था कि पूरा किचन हिल गया। धमाके के बाद आग भड़क उठी और कुछ ही मिनटों में धुआं रसोई से बाहर निकलकर होटल के अन्य हिस्सों में फैलने लगा। उसने दावा किया कि घबराहट और डर की स्थिति में उसने होटल की मुख्य बिजली सप्लाई बंद कर दी ताकि आग और न फैले।
हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे को पूरी तरह स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली आपूर्ति बंद करने के कारण होटल का इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक सिस्टम और कई अन्य सुरक्षा उपकरण काम करना बंद कर सकते थे। यदि ऐसा हुआ, तो कई मेहमान अपने कमरों में फंस गए होंगे और उन्हें बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला होगा। यही वजह है कि अब जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि बिजली सप्लाई बंद करने का निर्णय दुर्घटना को और गंभीर बनाने वाला कारक था या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक होटलों में सुरक्षा व्यवस्था कई इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर आधारित होती है। इनमें आपातकालीन अलार्म, इलेक्ट्रॉनिक लॉक, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था शामिल हैं। यदि अचानक बिजली काट दी जाए और बैकअप सिस्टम सही ढंग से काम न करे, तो आपात स्थिति में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच एजेंसियां होटल की तकनीकी व्यवस्था और बैकअप पावर सिस्टम की भी गहन जांच कर रही हैं।
घटना के बाद पुलिस ने होटल के कर्मचारियों, प्रबंधन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और तकनीकी उपकरणों की जांच भी की जा रही है। फोरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वास्तव में विस्फोट किस कारण से हुआ था। क्या इलेक्ट्रिक स्टोव में तकनीकी खराबी थी, बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ था, या फिर कोई अन्य कारण था—इन सभी बिंदुओं की जांच जारी है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यदि यह साबित हो जाता है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था या होटल प्रबंधन की ओर से लापरवाही बरती गई थी, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि कुक द्वारा बिजली सप्लाई बंद करना सीधे तौर पर जनहानि का कारण साबित होता है, तो इस पहलू को भी केस में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाएगा।
इस घटना ने राजधानी में होटल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों की जांच और कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है। कई बार तकनीकी खराबी या मानवीय भूल छोटे हादसे को बड़े संकट में बदल देती है।
फिलहाल पुलिस, फोरेंसिक टीम और अन्य जांच एजेंसियां मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं। कुक केशव के बयानों की भी सत्यता परखी जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और क्या बिजली सप्लाई बंद करने का निर्णय इस त्रासदी में अहम भूमिका निभाने वाला साबित हुआ। पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।