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काशी में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट-मछली की दुकानें, धार्मिक नगरी की पहचान को ध्यान में रखकर नगर निगम का बड़ा फैसला

वाराणसी : विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी काशी में मीट, मछली और पोल्ट्री कारोबार को लेकर नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगर निगम ने शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए मीट और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला […]

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  • June 7, 2026 6:06 pm IST, Published 1 hour ago

वाराणसी : विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी काशी में मीट, मछली और पोल्ट्री कारोबार को लेकर नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगर निगम ने शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए मीट और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में संचालित दुकानों को निर्धारित नए स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि इस कदम से काशी की पारंपरिक छवि को और मजबूत किया जा सकेगा तथा शहर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में भी सुधार होगा।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार वाराणसी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा घाटों की आध्यात्मिक अनुभूति के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों, मंदिरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित मीट और मछली की दुकानों को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा चल रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यह नई नीति तैयार की है।

प्रस्ताव के तहत मीट और मछली की दुकानों को शहर के बाहरी क्षेत्रों में विकसित किए जाने वाले विशेष बाजारों में स्थानांतरित किया जाएगा। इन बाजारों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। नगर निगम का कहना है कि नए बाजारों में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, पार्किंग और जल निकासी जैसी व्यवस्थाएं बेहतर होंगी, जिससे कारोबार भी व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकेगा।

अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कई दुकानों से निकलने वाला जैविक कचरा और अपशिष्ट स्वच्छता संबंधी चुनौतियां पैदा करता है। कई स्थानों पर दुर्गंध और गंदगी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। दुकानों के शहर से बाहर स्थानांतरण के बाद इन समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। इसके अलावा मुख्य बाजारों और सड़कों पर भीड़भाड़ कम होने से यातायात व्यवस्था को भी राहत मिलेगी।

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी व्यवसाय या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है। प्रशासन का उद्देश्य केवल शहर के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है। अधिकारियों ने कहा कि व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया सहज और विवाद रहित तरीके से पूरी हो सके।

इस फैसले के बाद शहर में विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे काशी की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप कदम बताया है। वहीं कुछ व्यापारियों ने नए स्थानों पर ग्राहकों की उपलब्धता और कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि नए बाजारों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि व्यापारियों के व्यवसाय पर नकारात्मक असर न पड़े।

फिलहाल नगर निगम द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आने वाले समय में दुकानों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो काशी देश का पहला ऐसा बड़ा धार्मिक शहर बन सकता है जहां मीट और मछली के कारोबार को व्यवस्थित रूप से शहर की सीमा के बाहर संचालित किया जाएगा। इससे एक ओर धार्मिक नगरी की पहचान को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शहरी प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में भी नया उदाहरण स्थापित हो सकता है।

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