बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में खाद्य तेल में मिलावट का बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की पिछले लगभग 15 महीनों में की गई जांच के दौरान लिए गए 172 खाद्य तेल के नमूनों में से 66 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। विभाग की जांच में इन नमूनों को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने मिलावटी तेल बनाने और बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार जिले में लंबे समय से छोटे स्तर पर संचालित कई इकाइयों और गोदामों से बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य तेल बाजार में सप्लाई किया जा रहा था। यह तेल कम कीमत पर तैयार कर विभिन्न ब्रांडों के नाम से बेचा जा रहा था। जांच में सामने आया कि कई उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं कर रहे थे, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी खाद्य तेल का लगातार सेवन करने से सबसे पहले पेट और आंतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे गैस, अपच, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और आंतों में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन किया जाए तो लीवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह खतरा और अधिक गंभीर माना जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियमित रूप से बाजारों, गोदामों और तेल निर्माण इकाइयों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान संदिग्ध उत्पादों के नमूने प्रयोगशाला भेजे जाते हैं, जहां उनकी गुणवत्ता और शुद्धता की जांच होती है। रिपोर्ट आने के बाद मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पादों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिन नमूनों में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी खामियां मिली हैं, उनके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों पर आर्थिक दंड के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। साथ ही जिन स्थानों पर अनियमितताएं पाई गई हैं, वहां निगरानी और सख्त कर दी गई है।
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को हमेशा विश्वसनीय ब्रांड और लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खाद्य तेल खरीदना चाहिए। अत्यधिक सस्ता तेल खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस नंबर की जांच अवश्य करनी चाहिए। खुले में बिकने वाले तेल के बजाय पैक्ड और प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि यदि किसी खाद्य तेल से असामान्य गंध आती हो, रंग अत्यधिक गहरा या हल्का लगे अथवा स्वाद सामान्य से अलग महसूस हो तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को भी दी जा सकती है ताकि समय रहते जांच और कार्रवाई हो सके।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर उसकी शिकायत करें। विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं की सतर्कता से मिलावटखोरों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है। साथ ही समय-समय पर चलाए जा रहे विशेष अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए प्रशासन, व्यापारियों और उपभोक्ताओं—तीनों की जिम्मेदारी है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी और बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी कितनी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच, सख्त कानूनी कार्रवाई और उपभोक्ताओं की जागरूकता ही मिलावट के इस कारोबार पर प्रभावी रोक लगा सकती है।