BSP में बड़ा उलटफेर, आकाश आनंद फिर बने राष्ट्रीय संयोजक

आकाश को हटाए जाने के बाद बसपा ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। सितंबर में ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की खबर सामने आई थी। उस समय मायावती ने आकाश और उनकी बहन दीपिका को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखने की बात कही थी। अब आकाश को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद संगठन में जिम्मेदारियों का नया समीकरण...

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  • October 5, 2026 7:30 pm IST, Published 3 minutes ago

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे पारिवारिक और संगठनात्मक विवाद के बीच सोमवार को बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही सप्ताह पहले आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाकर बाहर कर दिया गया था।

आकाश आनंद की वापसी को बसपा के भीतर हालिया घटनाक्रम का अहम मोड़ माना जा रहा है। सितंबर में मायावती ने आकाश को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी से भी दूरी बना ली थी। इस घटनाक्रम के बीच आकाश ने हाल में मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए दोबारा पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा था कि वह उनके नेतृत्व में ही पार्टी और बहुजन आंदोलन के लिए काम करना चाहते हैं।

आकाश आनंद ने अपने सार्वजनिक संदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि उनके किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने की खबरें सही नहीं हैं। उन्होंने बसपा को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि अपना परिवार बताया था। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया था कि भविष्य में पार्टी के हितों और नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे। उनके इस रुख के बाद बसपा नेतृत्व की ओर से उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई थी।

मायावती ने आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी सौंपने के फैसले के पीछे पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को प्रमुख कारण बताया। उनके मुताबिक आकाश के व्यक्तित्व और कार्यशैली में बदलाव आया है और पार्टी के अधिकांश लोगों ने भी उनकी वापसी का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन में बार-बार बदलाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए और आगे की स्थिति काफी हद तक आकाश के आचरण पर निर्भर करेगी।

आकाश की वापसी के घटनाक्रम को पार्टी के भीतर अशोक सिद्धार्थ से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मायावती ने पहले आकाश की वापसी को लेकर अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी शर्त रखी थी। उनका कहना था कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर रखना जरूरी है। बाद में अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी हुई।

आकाश को हटाए जाने के बाद बसपा ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। सितंबर में ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की खबर सामने आई थी। उस समय मायावती ने आकाश और उनकी बहन दीपिका को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखने की बात कही थी। अब आकाश को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद संगठन में जिम्मेदारियों का नया समीकरण बनना स्वाभाविक माना जा रहा है।

मायावती के इस फैसले के बाद बसपा के भीतर आकाश आनंद की भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आकाश को मिली जिम्मेदारी का राजनीतिक महत्व भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से भविष्य की संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर विस्तृत तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बसपा में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले जिम्मेदारी से हटाया जाना, फिर पार्टी से बाहर किया जाना, इसके बाद सार्वजनिक माफी और अब राष्ट्रीय संयोजक के पद पर वापसी ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आकाश आनंद नई जिम्मेदारी के साथ किस तरह संगठन में सक्रिय होते हैं और मायावती के भरोसे को अपने काम और आचरण के जरिए किस तरह कायम रखते हैं।

 

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