प्रतिबंधित मांझे की ऑनलाइन बिक्री की होगी जांच

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को दिए निर्देश लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच करे कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा कहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से तो नहीं बेचा जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि प्रतिबंध के बावजूद इसकी ऑनलाइन बिक्री हो रही […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 16, 2026 5:26 am IST, Published 3 minutes ago

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को दिए निर्देश

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच करे कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा कहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से तो नहीं बेचा जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि प्रतिबंध के बावजूद इसकी ऑनलाइन बिक्री हो रही है, तो इस मामले की गंभीरता से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वर्ष 2018 से लंबित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका एमएल यादव द्वारा दाखिल की गई थी, जबकि रज्जन खान की दो अन्य जनहित याचिकाएं भी इसके साथ संबद्ध हैं। इन याचिकाओं में प्रदेश में प्रतिबंधित मांझे के आयात, निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित मांझा आसानी से उपलब्ध है। इस दावे के समर्थन में एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया।

इस पर अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि इस दावे की जांच कर अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि प्रतिबंधित मांझे पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नया कानून तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित कानून का नाम “उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, विक्रय एवं उपयोग का प्रतिषेध) अधिनियम” रखा गया है।

सरकार के अनुसार, इस कानून में प्रतिबंधित मांझे से घायल होने या जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिजनों को मुआवजा देने का भी प्रावधान किया जा रहा है, ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके।

अदालत ने विपक्षी पक्ष की ओर से दाखिल संक्षिप्त प्रति-शपथपत्र और अन्य पक्षों के पूरक शपथपत्रों को अभिलेख पर लेते हुए राज्य सरकार को सभी संबंधित पक्षों को उनकी प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति भी प्रदान की।

सुनवाई के दौरान पूर्व आदेश के अनुपालन में पुलिस महानिदेशक (DGP), अपर मुख्य सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (राज्य कर), प्रमुख सचिव (पर्यावरण) और अपर मुख्य सचिव (अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए।

Advertisement