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APO भर्ती 2025 में आरक्षण विवाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट 7 सितंबर को करेगा सुनवाई

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2025 से जुड़े आरक्षण विवाद ने अब इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था के कथित अनुपालन को लेकर याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती के दौरान आरक्षण से जुड़े निर्धारित […]

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  • September 4, 2026 6:42 pm IST, Published 3 hours ago

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2025 से जुड़े आरक्षण विवाद ने अब इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था के कथित अनुपालन को लेकर याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती के दौरान आरक्षण से जुड़े निर्धारित नियमों और व्यवस्था का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से भर्ती प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण यानी प्रीलिम्स परीक्षा के परिणाम को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि परिणाम तैयार करने और अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए चयनित करने की प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले में आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है।

इस प्रकरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले से लंबित संबंधित मामले के साथ टाइड अप किया है। अब मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनीष कुमार की सिंगल बेंच करेगी। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मामले की सुनवाई सुबह 10 बजे होगी।

APO भर्ती-2025 उत्तर प्रदेश में विधि एवं अभियोजन से जुड़े पदों पर नियुक्ति के लिए महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठे सवाल ने अभ्यर्थियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। याचिका में मुख्य जोर इस बात पर है कि सरकारी भर्ती में लागू आरक्षण नियमों का पालन किस तरह किया गया और क्या प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम उसी व्यवस्था के अनुरूप तैयार हुआ।

आरक्षण से जुड़े मामलों में भर्ती प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से लेकर मुख्य परीक्षा और अंतिम चयन तक विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन किया जाना होता है। इसी संदर्भ में याचिका में भर्ती के प्रीलिम्स रिजल्ट को चुनौती दी गई है।

अब हाईकोर्ट की सुनवाई में याचिका में लगाए गए आरोपों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड पर विचार किया जाएगा। अदालत के सामने यह सवाल भी आ सकता है कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ता की आपत्ति कितनी उचित है और इसका भर्ती प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

7 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस दौरान अदालत मामले से जुड़े पक्षों की दलीलों पर विचार कर सकती है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था से संबंधित रिकॉर्ड भी न्यायालय के सामने रखा जा सकता है। अदालत यदि किसी तरह का निर्देश जारी करती है तो उसका असर APO भर्ती-2025 की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

अभ्यर्थियों की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है। खास तौर पर वे उम्मीदवार इस मामले को लेकर चिंतित हैं, जो प्रीलिम्स परीक्षा के परिणाम और आरक्षण व्यवस्था से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अगले कदम अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेंगे।

याचिका में लगाए गए आरक्षण नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी सुधार, संशोधन या अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई से मामले की दिशा और आगे की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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