प्रयागराज । प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला की तत्काल मदद कर सुरक्षित प्रसव में सहयोग करने वाले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दो उपनिरीक्षकों को सम्मानित किया गया। उपनिरीक्षक कार्तिक मिश्रा और उपनिरीक्षक उषा मौर्य को डीएम आवास पर प्रसिद्ध मनोविज्ञान काउंसलर, पैरेंटिंग कोच एवं लेखिका डॉ. अंकिता राज ने प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने दोनों आरपीएफ उपनिरीक्षकों की तत्परता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। सम्मान समारोह के दौरान डॉ. अंकिता राज ने कहा कि ड्यूटी का निर्वहन करते समय संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। कार्तिक मिश्रा और उषा मौर्य ने कठिन परिस्थिति में तत्काल निर्णय लेते हुए जिस तरह महिला की सहायता की, वह सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि दोनों उपनिरीक्षकों की तत्परता से मां और नवजात बच्ची को समय पर आवश्यक सहायता मिल सकी। ऐसी परिस्थितियों में कुछ ही मिनटों की देरी भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि समाज के अन्य लोगों को भी इस घटना से प्रेरणा लेते हुए जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
29 सितंबर को प्लेटफॉर्म पर शुरू हुई थी प्रसव पीड़ा
घटना 29 सितंबर की है। प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर उपनिरीक्षक कार्तिक मिश्रा और उपनिरीक्षक उषा मौर्य ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उनकी नजर 28 वर्षीय बसंती नाम की महिला पर पड़ी। महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी और उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी।
स्थिति को समझते हुए दोनों उपनिरीक्षकों ने बिना समय गंवाए महिला की मदद शुरू की। उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को भी नियंत्रित किया और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इसी दौरान महिला ने प्लेटफॉर्म पर ही एक बच्ची को जन्म दिया।
अचानक उत्पन्न हुई इस स्थिति में आरपीएफ कर्मियों की तत्परता महत्वपूर्ण रही। प्रसव के बाद महिला और नवजात बच्ची को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। आरपीएफ की ओर से बिना देरी किए मेडिकल टीम को सूचना दी गई।
मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर की जांच
सूचना मिलने के बाद डॉ. नूपुर पांडे तत्काल मौके पर पहुंचीं। उन्होंने महिला और नवजात शिशु की प्राथमिक जांच की तथा आवश्यक उपचार और देखभाल उपलब्ध कराई। चिकित्सकीय जांच के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया।
चिकित्सकों के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद मां और नवजात बच्ची दोनों स्वस्थ पाए गए। अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद भी दोनों की आवश्यक चिकित्सकीय देखरेख की गई।
आरपीएफ की सतर्कता से मिली समय पर मदद
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर अचानक प्रसव जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल निर्णय लेना बेहद जरूरी होता है। ऐसे समय में आरपीएफ कर्मियों की भूमिका केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जरूरत पड़ने पर यात्रियों और आम नागरिकों की सहायता करना भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
कार्तिक मिश्रा और उषा मौर्य ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए महिला की मदद की और मेडिकल टीम को समय पर सूचना दी। उनकी इस पहल से महिला और नवजात बच्ची को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।
सम्मान समारोह में इस घटना को मानवीय संवेदनशीलता और कर्तव्य के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया गया। दोनों उपनिरीक्षकों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किए जाने पर उपस्थित लोगों ने उनकी सराहना की और कहा कि ड्यूटी के दौरान इस तरह की तत्परता समाज में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास को मजबूत करती है।
यह घटना यह भी संदेश देती है कि आपात स्थिति में समय पर लिया गया निर्णय किसी व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रयागराज जंक्शन पर आरपीएफ कर्मियों की सक्रियता और चिकित्सकीय टीम की त्वरित मदद से मां और नवजात बच्ची को आवश्यक सहायता मिल सकी। दोनों उपनिरीक्षकों को मिला सम्मान उनकी इसी मानवीय पहल की सार्वजनिक सराहना के रूप में देखा जा रहा है।