गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने संस्थान की चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर चर्चा तेज कर दी है। एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें हृदय संबंधी जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस संस्थान में गंभीर बीमारियों के इलाज की उम्मीद लेकर हजारों मरीज पहुंचते हैं, वहां की शीर्ष अधिकारी को ही जांच के लिए दूसरे अस्पताल क्यों जाना पड़ा?
मामले की जानकारी सामने आने के बाद गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इस विषय को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसकी प्रमुख वजह एम्स गोरखपुर में कैथ लैब की सुविधा का अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं होना बताया जा रहा है। हालांकि, संस्थान की ओर से इस सुविधा को शुरू करने की दिशा में काम जारी होने की जानकारी दी गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें चक्कर आने और बेहोशी जैसी परेशानी हुई। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उन्हें एम्स के इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच और प्राथमिक उपचार किया।
प्रारंभिक जांच के दौरान उनका रक्तचाप और अन्य जरूरी स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट सामान्य बताई गईं। इसके बावजूद चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर हृदय से संबंधित विस्तृत जांच कराने की सलाह दी। डॉक्टरों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि उन्हें किसी प्रकार की गंभीर हृदय संबंधी समस्या तो नहीं है और आगे किसी विशेष उपचार की आवश्यकता तो नहीं पड़ेगी।
चूंकि एम्स गोरखपुर में उस समय कैथ लैब की सुविधा चालू नहीं थी, इसलिए उन्हें ऐसी निजी चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया, जहां आवश्यक हृदय संबंधी जांच की व्यवस्था उपलब्ध थी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा एम्स गोरखपुर में कैथ लैब का संचालन शुरू नहीं होना है। कैथ लैब आधुनिक हृदय चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसका इस्तेमाल हृदय की धमनियों में रुकावट का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर एंजियोग्राफी तथा एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं में किया जाता है।
हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए कई बार समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में कैथ लैब की उपलब्धता मरीजों को त्वरित चिकित्सा सहायता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गोरखपुर एम्स में इस सुविधा के पूरी तरह शुरू नहीं होने के कारण कुछ विशेष हृदय संबंधी जांचों और प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यही वजह है कि निदेशक को निजी अस्पताल ले जाने की घटना के बाद संस्थान की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में केवल सामान्य जांच और प्राथमिक उपचार की सुविधा होना पर्याप्त नहीं माना जाता। वहां गंभीर और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित चिकित्सकों और आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का उपलब्ध होना भी जरूरी है।
मीडिया में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, डॉ. विभा दत्ता को एहतियातन ऐसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध थी। वहां चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया और यह भी आकलन किया कि कहीं उन्हें पेसमेकर लगाने की आवश्यकता तो नहीं है।
जांच के बाद चिकित्सकों ने पेसमेकर की आवश्यकता नहीं बताई। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनकी हृदय संबंधी जांच की रिपोर्ट सामान्य रही। इसके बाद उन्हें किसी विशेष प्रक्रिया या सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।
इस मामले में डॉ. विभा दत्ता की ओर से भी स्पष्टीकरण सामने आया। उन्होंने बताया कि अचानक चक्कर आने की परेशानी हुई थी। एम्स में डॉक्टरों ने तत्काल उपचार किया और एहतियात के तौर पर आगे की जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया। निजी अस्पताल में रिपोर्ट सामान्य आने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर किसी गंभीर समस्या की बात से इनकार किया।
इस स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि निजी अस्पताल ले जाने का उद्देश्य आवश्यक जांच कराना था। इसे गंभीर बीमारी या किसी बड़े ऑपरेशन से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
इस घटना के बाद एम्स गोरखपुर प्रशासन की ओर से कैथ लैब को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। संस्थान के अनुसार, कैथ लैब को चालू करने से संबंधित लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष आवश्यकताओं को पूरा करने और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था करने की प्रक्रिया जारी है।
मीडिया रिपोर्टों में वरिष्ठ चिकित्सकों के हवाले से इस सुविधा के दिसंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, वास्तविक संचालन की तारीख जरूरी उपकरणों की उपलब्धता, तकनीकी तैयारियों और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय रोग से संबंधित जांच और उपचार की सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे गोरखपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को काफी राहत मिल सकती है।
गोरखपुर एम्स की स्थापना पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस संस्थान से गोरखपुर के अलावा देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर और बिहार के सीमावर्ती इलाकों के मरीजों को भी बेहतर उपचार की उम्मीद रहती है।
क्षेत्र के अनेक मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करने में आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे में एम्स जैसे सरकारी संस्थान उनके लिए बड़ी उम्मीद होते हैं।
हृदय रोग के मामलों में समय पर जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक चिकित्सा उपकरण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी मरीज को जांच या उपचार के लिए दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है, तो उसके लिए अतिरिक्त समय, परिवहन और आर्थिक संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए कैथ लैब जैसी सुविधा का जल्द शुरू होना केवल संस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. विभा दत्ता से जुड़ा यह घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। क्या एम्स गोरखपुर में हृदय संबंधी आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है? कैथ लैब के निर्माण और संचालन में कितना समय लगेगा? क्या जरूरी उपकरणों और विशेषज्ञ कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है?
इन सवालों का जवाब संस्थान की आगामी तैयारियों और कैथ लैब के वास्तविक संचालन से ही मिलेगा।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे संस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन नहीं किया जा सकता। एम्स में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया और आगे की जांच के लिए मरीज को ऐसी जगह भेजा गया, जहां आवश्यक सुविधा मौजूद थी। आपातकालीन चिकित्सा में मरीज की सुरक्षा और समय पर उचित उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
फिर भी, एक प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान में महत्वपूर्ण सुविधाओं के समय पर शुरू होने की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कैथ लैब का संचालन शुरू होने के बाद गोरखपुर एम्स की हृदय चिकित्सा सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे मरीजों को कई प्रकार की हृदय संबंधी जांच और प्रक्रियाओं के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके लिए जरूरी होगा कि संस्थान आधुनिक मशीनों के साथ प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों, हृदय रोग विशेषज्ञों और आपातकालीन चिकित्सा टीम की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित करे। केवल भवन और मशीनों की उपलब्धता से सुविधा पूरी तरह प्रभावी नहीं बनती, बल्कि उसका नियमित और सुरक्षित संचालन भी उतना ही जरूरी है।
पूर्वांचल के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स प्रशासन को शेष कार्य तेजी से पूरा करने की जरूरत है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की तबीयत बिगड़ने और हृदय संबंधी जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाए जाने का मामला चर्चा में है। राहत की बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी जांच सामान्य रही और पेसमेकर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
लेकिन इस घटना ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को फिर सामने ला दिया है। पूर्वांचल के इतने बड़े चिकित्सा संस्थान में कैथ लैब जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभी तक चालू नहीं होना चिंता का विषय है। अब मरीजों और स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संस्थान में यह सुविधा कब तक शुरू होती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एम्स गोरखपुर में इलाज की उम्मीद लेकर हजारों मरीज पहुंचते हैं, तो उन्हें सभी जरूरी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एक ही संस्थान में कब मिल पाएंगी?