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जोशीमठ में पहाड़ से उतरा मलबे का सैलाब, BRO का वैली ब्रिज बहा

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ क्षेत्र के तमक वैली में भारी जलप्रवाह और मलबे के सैलाब ने तबाही का मंजर दिखा दिया। पहाड़ से अचानक पानी और मलबा नीचे आने के कारण सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से बनाया गया वैली ब्रिज इसकी चपेट में आ गया और देखते ही देखते बह गया। […]

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  • August 11, 2026 8:30 pm IST, Published 48 minutes ago

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ क्षेत्र के तमक वैली में भारी जलप्रवाह और मलबे के सैलाब ने तबाही का मंजर दिखा दिया। पहाड़ से अचानक पानी और मलबा नीचे आने के कारण सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से बनाया गया वैली ब्रिज इसकी चपेट में आ गया और देखते ही देखते बह गया। पुल के बहने का पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है, जिसका वीडियो सामने आने के बाद इलाके में भय का माहौल है।

तमक वैली जोशीमठ से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर बताई जा रही है। यह क्षेत्र ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग से जुड़ा हुआ है और यहां बना पुल आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए आवाजाही का महत्वपूर्ण माध्यम था। पुल के क्षतिग्रस्त होने से घाटी से जुड़े दर्जनों गांवों की मुख्य क्षेत्र से कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। जानकारी के अनुसार, बारिश के कारण पहाड़ के ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहने लगा। पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा भी आया, जिससे नाले में जलप्रवाह बेहद तेज हो गया। कुछ ही समय में पानी और मलबे ने आसपास के क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।

स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन और सीमा सड़क संगठन के एक कर्मचारी के तेज बहाव में बहने की सूचना मिली है। हालांकि, घटना से जुड़ी अन्य संभावित जनहानि की खबरों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और राहत एवं बचाव से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अचानक आए तेज जलप्रवाह के कारण घटनास्थल पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। प्रभावित क्षेत्र में बचाव और राहत कार्यों के साथ-साथ संभावित खतरे वाले स्थानों की निगरानी की जा रही है।

वैली ब्रिज के बह जाने का सीधा असर स्थानीय लोगों की आवाजाही पर पड़ा है। पुल इस क्षेत्र के कई गांवों को मुख्य सड़क और आसपास के बाजारों से जोड़ता था। इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद दर्जनों गांवों की कनेक्टिविटी बाधित हो गई है।कनेक्टिविटी टूटने से स्थानीय लोगों के सामने जरूरी सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और आवागमन को लेकर चुनौती पैदा हो सकती है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने और जल्द से जल्द वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने तमकनाला में अत्यधिक जलप्रवाह से हुए नुकसान के बाद राहत और पुनर्बहाली कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने चमोली के जिलाधिकारी और गढ़वाल मंडल आयुक्त से मौजूदा स्थिति की जानकारी लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने पर जोर दिया। अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

क्षतिग्रस्त मार्ग पर यातायात जल्द बहाल करने के लिए वैकल्पिक अस्थायी मोटर मार्ग तैयार करने का काम तेज कर दिया गया है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर कनेक्टिविटी बहाल करने के विकल्प तलाश रही हैं। भूस्खलन और अचानक बढ़े जलप्रवाह जैसी घटनाओं को देखते हुए लोगों से संवेदनशील स्थानों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की जा सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों के आसपास विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

तमक वैली की घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान पैदा होने वाले अचानक जलप्रवाह और भूस्खलन के खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री पहुंचाने और क्षेत्र की कनेक्टिविटी को जल्द बहाल करने पर है।

 

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