श्रीनगर। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बाबा अमरनाथ यात्रा को निर्धारित समय से करीब 20 दिन पहले रोक दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 9 अगस्त से पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर नए जत्थों की आवाजाही रोकने का फैसला किया है। हालांकि, जो श्रद्धालु पहले से यात्रा पर निकल चुके हैं, उनकी यात्रा पूरी कराई जाएगी।
अब तक 4.8 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन कर चुके हैं। डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग के अनुसार, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना जरूरी समझा गया।
प्रशासनिक रूप से यात्रा 9 अगस्त से रोक दी गई है, लेकिन अमरनाथ यात्रा का पारंपरिक धार्मिक समापन बाद में होगा। 28 अगस्त को छड़ी मुबारक पारंपरिक पहलगाम मार्ग से पवित्र अमरनाथ गुफा तक जाएगी। इसी धार्मिक परंपरा के साथ अमरनाथ यात्रा-2026 का औपचारिक समापन माना जाएगा।
अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग का आकार इस वर्ष मौसम में बदलाव के साथ तेजी से घटा। 23 मई को BSF की ओर से जारी तस्वीर में हिमलिंग करीब 7 फीट ऊंचा दिखाई दे रहा था। 29 जून को पहली पूजा के समय भी इसकी ऊंचाई 5 फीट से अधिक बताई गई थी।
इसके बाद तापमान और मौसम की परिस्थितियों में बदलाव के चलते हिमलिंग का आकार तेजी से कम हुआ। 6 जुलाई तक यह करीब 90 प्रतिशत तक पिघल चुका था और 7 जुलाई को इसके पूरी तरह गायब होने की तस्वीर सामने आई। हालांकि, इसके बावजूद अमरनाथ यात्रा जारी रही।
अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग किसी बर्फ के टुकड़े को तराशकर नहीं बनाया जाता। यह एक प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। गुफा की छत से टपकने वाला पानी ठंडे वातावरण में जमता रहता है और धीरे-धीरे बर्फ का आकार बनता है।
हिमलिंग का आकार हर साल तापमान, मौसम और पानी की उपलब्धता जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यही वजह है कि अलग-अलग वर्षों में इसकी ऊंचाई और आकार में काफी अंतर देखने को मिलता है।
अमरनाथ गुफा में वर्ष 1999 की तस्वीरों में हिमलिंग 10 फीट से अधिक ऊंचा दिखाई दिया था। इससे पता चलता है कि प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार हिमलिंग का आकार हर साल बदलता रहता है।
अमरनाथ यात्रा के लिए मुख्य रूप से दो मार्ग हैं। नुनवान-पहलगाम मार्ग करीब 48 किलोमीटर लंबा है। यह अपेक्षाकृत लंबा लेकिन कम कठिन रास्ता माना जाता है।
वहीं, बालटाल मार्ग करीब 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसमें कठिन और खड़ी चढ़ाई वाले हिस्से शामिल हैं। खराब मौसम और भूस्खलन के कारण दोनों मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा का निर्धारित समापन 28 अगस्त को होना था, लेकिन खराब मौसम और रास्तों की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए यात्रा 9 अगस्त से ही रोक दी गई है।