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उड़ने वाली कार के बाद अब रवि टम्टा का नया प्रोजेक्ट क्या है?

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के युवा इनोवेटर रवि टम्टा एक बार फिर अपनी तकनीकी सोच और प्रयोगों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी कंपनी Hapida Sky से जुड़े HAPIDA SKYNeX प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइट ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। यह सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है, जिसे ड्रोन तकनीक को आधार […]

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  • August 9, 2026 6:40 pm IST, Published 58 minutes ago

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के युवा इनोवेटर रवि टम्टा एक बार फिर अपनी तकनीकी सोच और प्रयोगों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी कंपनी Hapida Sky से जुड़े HAPIDA SKYNeX प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइट ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। यह सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है, जिसे ड्रोन तकनीक को आधार बनाकर विकसित किया गया है। अब उड़ने वाली कार के सफल परीक्षण के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि रवि टम्टा का अगला प्रोजेक्ट क्या होगा और वह इस तकनीक को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।

उड़ने वाली कार ने खींचा लोगों का ध्यान

अल्मोड़ा के काफलीखान क्षेत्र से जुड़े रवि टम्टा लंबे समय से पहाड़ी इलाकों और ग्रामीण जीवन को आसान बनाने वाली तकनीक पर काम करते रहे हैं। उनकी कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वे हिल एरिया और गांवों के लिए विज्ञान एवं तकनीक आधारित समाधान विकसित करने पर जोर देते हैं। कंपनी के संस्थापक के तौर पर रवि टम्टा का नाम दर्ज है।

हालिया प्रोजेक्ट HAPIDA SKYNeX एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है। इसकी खासियत यह है कि यह पारंपरिक सड़क परिवहन के बजाय हवा के रास्ते यात्रा की संभावनाओं को तलाशता है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसके प्रोटोटाइप का परीक्षण अल्मोड़ा में किया गया और इसके उड़ान भरने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आए।

हालांकि, इसे फिलहाल बाजार में उपलब्ध आम कार या व्यावसायिक फ्लाइंग टैक्सी समझना सही नहीं होगा। यह अभी प्रोटोटाइप स्तर की तकनीक है, जिसे आगे और विकसित किए जाने की जरूरत है।

पहाड़ों के लिए क्यों अहम हो सकती है यह तकनीक?

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में कई स्थानों के बीच सड़क से पहुंचने में काफी समय लगता है। घुमावदार पहाड़, संकरी सड़कें और भौगोलिक कठिनाइयां यात्रा की दूरी और समय दोनों बढ़ा देती हैं। ऐसे में व्यक्तिगत हवाई परिवहन की तकनीक भविष्य में एक वैकल्पिक रास्ता खोल सकती है।

इसी संभावना को लेकर HAPIDA SKYNeX को खास तौर पर चर्चा मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, रवि टम्टा का कहना है कि जिन रास्तों पर सड़क से लंबा समय लगता है, वहां हवाई मार्ग से यात्रा का समय काफी कम किया जा सकता है।

हालांकि, किसी भी व्यक्तिगत उड़ने वाले वाहन को आम लोगों के इस्तेमाल तक पहुंचाने से पहले सुरक्षा, बैटरी क्षमता, उड़ान नियंत्रण, मौसम, आपातकालीन लैंडिंग और नियामकीय मंजूरी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम करना होगा।

ड्रोन तकनीक से आगे बढ़ाने की कोशिश

HAPIDA SKYNeX को ड्रोन तकनीक के संशोधित और उन्नत रूप के तौर पर रिपोर्ट किया गया है। इसका वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग सिस्टम इसे पारंपरिक रनवे की जरूरत से अलग श्रेणी में रखता है। ऐसी तकनीक में वाहन सीमित स्थान से ऊपर उठने और नीचे उतरने की क्षमता विकसित कर सकता है।

यही वजह है कि इसे पहाड़ी इलाकों के संदर्भ में खास माना जा रहा है। यदि भविष्य में इस तरह के वाहनों की तकनीक अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती बनती है, तो दुर्गम इलाकों में आपातकालीन सहायता, पर्यटन और तेज व्यक्तिगत परिवहन जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

रवि टम्टा का अगला प्रोजेक्ट क्यों चर्चा में?

उड़ने वाली कार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रवि टम्टा इस तकनीक को आगे किस रूप में विकसित करेंगे। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में SKYNeX को एक प्रोटोटाइप के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसलिए इसके अगले चरण, व्यावसायिक उत्पादन या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर अभी सावधानी बरतना जरूरी है।

रवि टम्टा का पुराना काम भी यह संकेत देता है कि उनका फोकस केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। HAPIDA की वेबसाइट पर मोबाइल चार्जेबल शूज, स्मार्ट बांस स्टिक और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग से जुड़े नवाचारों का उल्लेख किया गया है। कंपनी खुद को हिल क्षेत्रों और ग्रामीण जीवन के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने वाले इनोवेशन प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करती है।

40 किलोमीटर का सफर 10 मिनट में?

इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात यात्रा के समय में संभावित कमी है। ईटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि रवि टम्टा के गांव से उनके घर तक लगभग 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा में करीब 90 मिनट लग सकते हैं, जबकि हवाई रास्ते से यह दूरी लगभग 10 मिनट में तय करने की संभावना बताई गई है।

लेकिन इसे वर्तमान सेवा या गारंटीकृत यात्रा समय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक संभावित उपयोगिता है, जो तकनीक के आगे विकसित होने और आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा करने पर निर्भर करेगी।

क्या आम लोग खरीद सकेंगे उड़ने वाली कार?

यही वह सवाल है जो सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल इसका सीधा जवाब नहीं है। HAPIDA SKYNeX अभी प्रोटोटाइप चरण में है। इसे आम बाजार में उपलब्ध कार की तरह खरीदने या नियमित यातायात में इस्तेमाल करने की स्थिति अभी नहीं आई है।

भविष्य में यदि इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर ले जाना है तो विमानन नियमों, एयरस्पेस प्रबंधन, पायलट या ऑपरेटर प्रशिक्षण, वाहन प्रमाणन, बीमा, सुरक्षा परीक्षण और आपातकालीन व्यवस्था जैसे कई स्तरों पर मंजूरी और परीक्षण आवश्यक होंगे।

सोशल मीडिया से लेकर तकनीकी जगत तक चर्चा

रवि टम्टा के फ्लाइंग व्हीकल के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर उत्साह भी दिखा और सवाल भी उठे। कुछ लोग इसे भारत में उभरते स्वदेशी इनोवेशन का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने इसकी तकनीक, सुरक्षा और व्यावहारिक उपयोग को लेकर सवाल पूछे हैं। ऐसी प्रतिक्रियाएं किसी भी नए प्रोटोटाइप के लिए स्वाभाविक हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SKYNeX को फिलहाल एक प्रयोगात्मक उड़ने वाले वाहन के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि पूरी तरह तैयार भविष्य की कार के रूप में।

पहाड़ों में बदल सकता है परिवहन का तरीका

यदि रवि टम्टा और उनकी टीम इस प्रोटोटाइप को तकनीकी और सुरक्षा स्तर पर सफलतापूर्वक आगे ले जाती है, तो यह उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए दिलचस्प प्रयोग साबित हो सकता है। सड़क निर्माण की कठिन परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में भविष्य में छोटे हवाई वाहनों की भूमिका बढ़ सकती है।

फिलहाल उड़ने वाली कार की सफल टेस्टिंग के बाद असली रोमांच इस बात का है कि रवि टम्टा का अगला कदम क्या होगा। क्या SKYNeX को और अधिक सुरक्षित और शक्तिशाली बनाया जाएगा, क्या इसे दो या अधिक यात्रियों के लिए विकसित किया जाएगा, या फिर इसका इस्तेमाल किसी नए क्षेत्र में किया जाएगा—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही स्पष्ट होंगे।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और HAPIDA की सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। SKYNeX को अभी प्रोटोटाइप स्तर की तकनीक के रूप में समझना उचित है।

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