न्यूयॉर्क: चर्चित लेखक सलमान रुश्दी पर वर्ष 2022 में हुए जानलेवा हमले के मामले में अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने न्यू जर्सी निवासी 28 वर्षीय हादी मतर को आतंकवाद से जुड़े कई गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया है। अदालत के फैसले के साथ यह मामला एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक कट्टरता और सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा में आ गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार हादी मतर ने 12 अगस्त 2022 को न्यूयॉर्क राज्य में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद सलमान रुश्दी पर चाकू से कई वार किए थे। इस हमले में रुश्दी गंभीर रूप से घायल हुए थे और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। लंबे उपचार के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन हमले के कारण उन्हें स्थायी शारीरिक क्षति का सामना करना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान संघीय अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीशों के पैनल ने मतर को घोषित विदेशी आतंकवादी संगठन हिज्बुल्ला को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास, राष्ट्रीय सीमाओं से परे आतंकवादी कृत्य में संलिप्त होने और आतंकवादियों की सहायता करने जैसे आरोपों में दोषी माना। अदालत ने माना कि आरोपी की गतिविधियां केवल व्यक्तिगत हिंसा का मामला नहीं थीं, बल्कि उनका संबंध आतंकवाद से जुड़े व्यापक उद्देश्यों से था।
जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि आरोपी सलमान रुश्दी के लेखन से जुड़े विवादों से प्रभावित था। विशेष रूप से वर्ष 1988 में प्रकाशित उपन्यास The Satanic Verses को लेकर वर्षों पहले जारी किए गए फतवे का उल्लेख भी सुनवाई के दौरान सामने आया। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी इसी विचारधारा से प्रेरित होकर हमले को अंजाम देने पहुंचा था।
सलमान रुश्दी लंबे समय से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थक लेखक माने जाते हैं। उनकी पुस्तक के प्रकाशन के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे और उनके खिलाफ गंभीर धमकियां भी सामने आई थीं। इसी कारण वर्षों तक उन्हें कड़ी सुरक्षा में रहना पड़ा। 2022 का हमला यह दिखाता है कि दशकों पुराना विवाद भी आज के समय में हिंसक घटनाओं का कारण बन सकता है।
संघीय अदालत का यह फैसला आतंकवाद से जुड़े मामलों में अमेरिकी न्याय व्यवस्था के सख्त रुख को दर्शाता है। यदि किसी हिंसक घटना के पीछे से जुड़ा उद्देश्य या समर्थन साबित होता है, तो आरोप और सजा दोनों अधिक गंभीर हो सकते हैं। अंतिम सजा का निर्धारण अदालत अलग चरण में करेगी।
इस मामले ने दुनिया भर में लेखकों, पत्रकारों और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पहले भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा था कि विचारों से असहमति का जवाब हिंसा नहीं हो सकता। लोकतांत्रिक समाज में लेखन और अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा आवश्यक है, यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले का निष्कर्ष नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि आतंकवाद से प्रेरित हिंसा और सार्वजनिक मंचों पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। आने वाले समय में इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में एक अहम उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।