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नेपाल बाढ़ पीड़ितों की पहचान में भारत की बड़ी मदद

 परिजनों के लिए मुफ्त होगी डीएनए जांच नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की पहचान में भारत मदद के लिए आगे आया है। भारत सरकार ने फैसला किया है कि नेपाल बाढ़ में लापता लोगों के भारतीय परिजनों के लिए देश की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में […]

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  • September 4, 2026 9:51 am IST, Published 46 minutes ago

 परिजनों के लिए मुफ्त होगी डीएनए जांच

नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की पहचान में भारत मदद के लिए आगे आया है। भारत सरकार ने फैसला किया है कि नेपाल बाढ़ में लापता लोगों के भारतीय परिजनों के लिए देश की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो कई दिनों से अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत में रहने वाले लापता लोगों के करीबी रिश्तेदार अपने जैविक नमूने देकर डीएनए प्रोफाइल तैयार करा सकेंगे। इसके बाद इस प्रोफाइल का मिलान नेपाल में मिले अज्ञात शवों के डीएनए नमूनों से किया जाएगा। इससे मृतकों की पहचान करने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलेगी।

माता-पिता, बेटा-बेटी और भाई-बहन करा सकेंगे जांच

इस विशेष सुविधा का लाभ लापता व्यक्ति के करीबी जैविक रिश्तेदार उठा सकेंगे। इनमें माता-पिता, बेटा-बेटी तथा भाई-बहन शामिल हैं। रिश्तेदारों के जैविक नमूने लेकर उनकी डीएनए प्रोफाइल तैयार की जाएगी।

यह प्रक्रिया केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय तथा डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा वाली राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में की जाएगी।

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों में भारी तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाली अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों से अब तक 1,290 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बचाव दलों ने अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं करीब 5 हजार लोगों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

डीएनए से होगी अज्ञात शवों की पहचान

बाढ़ के बाद कई शवों की पहचान नहीं हो सकी है। ऐसे में डीएनए जांच को सबसे प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार, शवों की पहचान के लिए ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत में तैयार की गई डीएनए प्रोफाइल को नेपाल में मिले अज्ञात शवों के डीएनए नमूनों से मिलाया जाएगा। यदि दोनों नमूनों में आनुवंशिक मिलान पाया जाता है, तो लापता व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करने में मदद मिलेगी।

भारतीय दूतावास ने भी साझा की जानकारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 26 अगस्त को बाढ़ पीड़ितों की पहचान से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा की थी। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल के तहत भारत में उपलब्ध फोरेंसिक सुविधाओं का इस्तेमाल इस प्रक्रिया में किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया नेपाल के अधिकारियों द्वारा निर्धारित तकनीकी आवश्यकताओं और मानकों के अनुसार की जाएगी।

परिवारों को पहचान की उम्मीद

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद कई भारतीय परिवार अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। डीएनए जांच की मुफ्त सुविधा मिलने से ऐसे परिवारों को अपने लापता परिजनों की पहचान कराने में आर्थिक परेशानी नहीं होगी।

भारत की यह पहल न केवल पीड़ित परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनेगी, बल्कि आपदा के बाद अज्ञात शवों की पहचान और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को भी तेज करने में मदद कर सकती है।

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