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नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा, तबाही पर जताई गहरी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल में आई भीषण तबाही पर चिंता जताते हुए कहा है कि अमेरिका वहां हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने नेपाल के नेतृत्व से संपर्क किया है और उन्हें जरूरत के मुताबिक सहायता लेने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि नेपाल […]

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  • August 28, 2026 11:36 am IST, Published 27 minutes ago

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल में आई भीषण तबाही पर चिंता जताते हुए कहा है कि अमेरिका वहां हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने नेपाल के नेतृत्व से संपर्क किया है और उन्हें जरूरत के मुताबिक सहायता लेने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि नेपाल के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध हैं और मौजूदा हालात बेहद दुखद और भयावह हैं।

ट्रंप ने नेपाल में हुई तबाही का जिक्र करते हुए कहा कि वहां का दृश्य इतना विनाशकारी है कि मजबूत और अच्छी तरह बनी इमारतें भी कुछ ही समय में पूरी तरह ढह गईं। उन्होंने इस तबाही की तुलना टूथपिक के ढेर के बिखर जाने से करते हुए कहा कि उन्होंने इससे पहले इस तरह का मंजर कभी नहीं देखा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि नेपाल में उस समय करीब 50 से 60 अमेरिकी नागरिक मौजूद हो सकते थे। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन को अभी तक सभी लोगों की पूरी सूची नहीं मिली थी। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि नेपाल में मौजूद अमेरिकी नागरिक सुरक्षित होंगे और राहत एवं बचाव अभियान के दौरान उनकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और प्रभावित क्षेत्रों तक तत्काल सहायता पहुंचाना है। अमेरिका नेपाल की जरूरतों के अनुसार राहत सामग्री, बचाव दल या अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। ट्रंप के अनुसार, नेपाल के नेतृत्व को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वह अपनी जरूरत के हिसाब से अमेरिका से सहायता मांग सकता है।

नेपाल में हुई तबाही ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े प्राकृतिक हादसों के दौरान शहरों और ग्रामीण इलाकों में मौजूद इमारतें कितनी सुरक्षित हैं। भूकंप जैसी आपदा में केवल पुरानी इमारतें ही नहीं, बल्कि मजबूत दिखाई देने वाली संरचनाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे समय में राहत एजेंसियों के लिए मलबे में फंसे लोगों तक तेजी से पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

ट्रंप ने अपने बयान में संभावित जनहानि को लेकर भी आशंका जताई। उन्होंने कहा कि हालात बेहद खराब दिखाई दे रहे हैं और दुर्भाग्य से कई लोगों के लापता होने या जान गंवाने की आशंका हो सकती है। हालांकि, किसी भी आपदा के शुरुआती घंटों में नुकसान का वास्तविक आकलन करना मुश्किल होता है। मलबा हटाने, प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटाने और अस्पतालों से आंकड़े मिलने के बाद ही स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आती है।

अमेरिका की ओर से नेपाल को सहायता की पेशकश ऐसे समय में सामने आई है जब किसी भी अंतरराष्ट्रीय आपदा के दौरान विदेशी सहायता राहत प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। हालांकि, वास्तविक सहायता किस रूप में और कितनी तेजी से पहुंचाई जाएगी, यह नेपाल सरकार की जरूरतों और दोनों देशों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगा।

इस बीच, नेपाल में स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, चिकित्सा सुविधाएं और अस्थायी आश्रय पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार और परिवहन व्यवस्था बाधित होने पर राहत कार्य और भी कठिन हो जाता है।

ट्रंप के बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि अमेरिका नेपाल को इस कठिन समय में अकेला नहीं छोड़ना चाहता। उन्होंने नेपाल के साथ अमेरिका के संबंधों का उल्लेख करते हुए सहायता के लिए तैयार रहने की बात कही। अब सभी की नजरें राहत और बचाव अभियानों पर हैं, जिनसे लापता लोगों की जानकारी मिलने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचने की उम्मीद है।

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