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अमेरिका में नौकरी का सपना अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पड़ेगा महंगा

अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वहीं नौकरी करने का सपना देखने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आने वाले समय में राह पहले से अधिक महंगी हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देने वाले एक विशेष […]

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  • August 1, 2026 11:25 am IST, Published 34 minutes ago

अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वहीं नौकरी करने का सपना देखने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आने वाले समय में राह पहले से अधिक महंगी हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देने वाले एक विशेष वीजा पर लगभग 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सीधा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा जो अमेरिका में शिक्षा पूरी करने के बाद पेशेवर करियर शुरू करना चाहते हैं।

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी वीजा नीति और आव्रजन नियमों को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा पर इसी तरह का भारी शुल्क लगाने से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े वीजा नियमों पर नई चर्चा शुरू हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने के इच्छुक विदेशी छात्रों को जारी किए जाने वाले वीजा पर लगभग 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी की योजना बना रहे छात्रों के लिए लागत कई गुना बढ़ सकती है। इससे विशेष रूप से भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के उन छात्रों पर असर पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढाई करते हैं।

अमेरिका लंबे समय से दुनिया के सबसे लोकप्रिय शिक्षा केंद्रों में शामिल रहा है। हर वर्ष लाखों विदेशी छात्र यहां विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, चिकित्सा और अन्य विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने पहुंचते हैं। इनमें भारतीय छात्रों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। कई छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिकी कंपनियों में काम का अनुभव हासिल करना चाहते हैं। यदि वीजा शुल्क में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो अनेक छात्रों के लिए आर्थिक रूप से अमेरिका में करियर बनाना कठिन हो सकता है।

जानकारों का मानना है की इससे कुछ छात्र कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य देशों की ओर भी रुख कर सकते हैं, जहां पढ़ाई के बाद रोजगार से जुड़े नियम अपेक्षाकृत सरल माने जाते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा से जुड़े एक प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। एच-1बी वीजा के माध्यम से विदेशी पेशेवर अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं और भारतीय आईटी पेशेवर इसका सबसे बड़ा हिस्सा हैं।

अदालत के फैसले के बाद माना जा रहा था कि वीजा शुल्क बढ़ाने की दिशा में सरकार की योजना को झटका लगा है। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े नए प्रस्ताव ने एक बार फिर वीजा नीति पर बहस तेज कर दी है। भारत अमेरिका में पढ़ने वाले छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा और बेहतर करियर के उद्देश्य से अमेरिका जाते हैं। ऐसे में यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो भारतीय परिवारों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

पहले से ही ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, स्वास्थ्य बीमा और अन्य खर्च काफी अधिक हैं। यदि नौकरी से जुड़े वीजा पर भी भारी शुल्क लागू होता है, तो छात्रों को अपने करियर की योजना नए सिरे से बनानी पड़ सकती है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन बताया जा रहा है और इसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुल्क कितना होगा, किन छात्रों पर लागू होगा और इसके नियम क्या होंगे।

फिलहाल विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों और उनके परिवारों की नजर अमेरिका की नई वीजा नीति पर टिकी हुई है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और वैश्विक रोजगार के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

 

 

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