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खामेनेई की विदाई के बीच ट्रंप का तंज, बयान से फिर बढ़ा ईरान-अमेरिका तनाव

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई दिए जाने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने दोनों देशों के बीच जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने अपने एक सार्वजनिक संबोधन में ईरान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका ने “अंतिम संस्कार के लिए […]

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  • July 4, 2026 11:26 am IST, Published 2 hours ago

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई दिए जाने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने दोनों देशों के बीच जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने अपने एक सार्वजनिक संबोधन में ईरान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका ने “अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया क्योंकि हम अच्छे लोग हैं।” उनके इस बयान को समर्थकों ने तालियों और ठहाकों के साथ स्वागत किया, जबकि ईरान में इसे संवेदनहीन और उकसावे वाला बयान माना जा रहा है।

ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यदि ईरान भविष्य में किसी समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाओं के बाद ईरान बातचीत के लिए पहले से अधिक इच्छुक दिखाई दे रहा है।

उधर, तेहरान में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं। राजधानी की कई प्रमुख सड़कों पर यातायात सीमित कर दिया गया है और बड़ी संख्या में लोग अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं। शोक जुलूसों में लोगों के हाथों में खामेनेई के चित्र और धार्मिक झंडे देखे गए, जबकि कई स्थानों पर पारंपरिक शोक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रही। सुरक्षा कारणों और हालिया सैन्य तनाव को देखते हुए समारोह के दौरान विशेष सतर्कता बरती गई। प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई अस्थायी प्रतिबंध भी लागू किए।

ऐसे समय में ट्रंप का बयान केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर ईरान-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं। ईरान में शोक समारोह के दौरान कई स्थानों पर अमेरिका विरोधी नारे भी सुनाई दिए। वहीं, सरकार समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय एकजुटता का अवसर बताया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा या कूटनीतिक संवाद की कोई नई संभावना बनेगी।

 

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