गोरखपुर। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद एवं महान राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से भाजपा नेता सोनिका खरवार ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण किया।
सोनिका खरवार ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष होने के साथ-साथ राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और देश की एकता के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
उन्होंने अपने संदेश में डॉ. मुखर्जी के प्रसिद्ध नारे “एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान—नहीं चलेंगे” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं बल्कि भारत की अखंडता और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक था। इस विचार ने देश में राष्ट्रीय एकता के प्रति नई चेतना का संचार किया और लाखों लोगों को राष्ट्रहित के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी।
सोनिका खरवार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से देश के सामने राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका व्यक्तित्व भारतीय राजनीति और शिक्षा जगत दोनों में समान रूप से सम्मानित रहा। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और राष्ट्रहित के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का सपना एक सशक्त, आत्मनिर्भर और अखंड भारत का था। उनके विचार आज भी देश की विकास यात्रा में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि वर्तमान समय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। देश की एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के जीवन संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव से प्रेरणा लेकर देश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में सोनिका खरवार ने लिखा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ओजस्वी व्यक्तित्व और उनके विचार सदैव राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। उन्होंने उनके प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को कभी भुला नहीं सकता।
गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री तथा भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में तत्कालीन विशेष प्रावधानों का विरोध करते हुए राष्ट्रीय एकीकरण के लिए व्यापक अभियान चलाया। इसी आंदोलन के दौरान वर्ष 1953 में उनकी हिरासत के दौरान मृत्यु हो गई थी, जिसे भाजपा सहित अनेक संगठन उनके सर्वोच्च राष्ट्रबलिदान के रूप में स्मरण करते हैं।
देशभर में उनकी जयंती के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं, संगोष्ठियों एवं विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उनके जीवन और विचारों को याद करते हुए श्रद्धांजलि संदेश साझा किए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जिनके विचारों का प्रभाव आज भी राष्ट्रीय विमर्श में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। शिक्षा, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में उनके योगदान को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे और भारत को एक सशक्त एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।