नई दिल्ली: सहकारिता मंत्रालय के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा, नई गति और नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे तकनीक, पारदर्शिता और आधुनिक प्रबंधन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का व्यापक अभियान बनाया गया है।
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद देशभर की लाखों सहकारी संस्थाओं और करोड़ों सदस्यों को एक साझा मंच मिला है। मंत्रालय ने बीते पांच वर्षों में संस्थागत सुधार, डिजिटल परिवर्तन, वित्तीय मजबूती और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि आज देशभर की सहकारी संस्थाओं का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा चुका है, जिससे योजनाओं की निगरानी और विस्तार अधिक प्रभावी हुआ है। सहकारी समितियों की रैंकिंग व्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन और तकनीकी सुधारों के जरिए पूरे तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
गृह मंत्री ने कहा कि कृषि, डेयरी, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स, बीज उत्पादन, जैविक खेती, ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों को सहकारिता मॉडल से जोड़कर ग्रामीण विकास को नई गति दी जा रही है। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर गठित नई सहकारी संस्थाएं वैश्विक स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाएंगी।
उन्होंने विशेष रूप से बीज उत्पादन के क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत बीज सहकारी समिति को देश की अग्रणी बीज उत्पादक संस्था बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध होंगे।

PACS का बढ़ता दायरा
अमित शाह ने बताया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। हजारों PACS अब डिजिटल सेवाएं, किसान समृद्धि केंद्र, जन औषधि केंद्र और अन्य नागरिक सेवाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार द्वारा PACS के कंप्यूटरीकरण पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है, जिससे इनके कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
सहकारी बैंकिंग और सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से बैंकिंग व्यवस्था अधिक मजबूत हुई है। जिला सहकारी बैंकों का कारोबार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जबकि एनपीए में कमी दर्ज की गई है। अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मॉडल को जैविक खेती, गोबर प्रबंधन, जैविक उर्वरक, ऊर्जा उत्पादन और सर्कुलर इकोनॉमी से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक विकल्पों को अपनाने की अपील की।

2047 का विजन
गृह मंत्री ने कहा कि जब देश आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब विकसित और समृद्ध भारत की मजबूत आर्थिक नींव सहकारिता आंदोलन होगा। उनका विश्वास है कि सहकारिता मॉडल गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के दौरान कई नई परियोजनाओं का शुभारंभ, गोदामों का उद्घाटन, डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च, डेयरी एवं बीज उत्पादन से जुड़ी पहलें तथा सहकारिता क्षेत्र से संबंधित नई योजनाओं की शुरुआत भी की गई।