नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई हिस्सों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 50 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक इस अभियान को “ऑपरेशन हार्ड बॉल (Operation Hard Ball)” नाम दिया गया। इसमें उन नेटवर्कों को निशाना बनाया गया जो हत्या, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की अवैध खरीद-बिक्री, अपहरण और अन्य संगठित अपराधों से जुड़े होने के संदेह में जांच एजेंसियों के रडार पर थे।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार यह कार्रवाई कई वर्षों से चल रही विस्तृत जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियों ने कैलिफोर्निया, इंडियाना, जॉर्जिया सहित अमेरिका के विभिन्न राज्यों के अलावा कनाडा और स्पेन में भी समन्वित छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान मिले डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर सर्च वारंट जारी किए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार इस संयुक्त अभियान में कुल 50 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वित्तीय दस्तावेज, संचार रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई है, जिनकी फोरेंसिक जांच जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि इस मामले में कुल 37 लोगों के खिलाफ संघीय स्तर पर आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि लगभग 10 आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। शेष आरोपियों की तलाश के लिए विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क अब केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कई देशों में फैले हुए हैं। यही कारण है कि इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। एफबीआई, डीओजे और अन्य देशों की एजेंसियां लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान कर ऐसे नेटवर्कों के खिलाफ संयुक्त रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में अपराधी संगठन सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल वित्तीय माध्यमों का उपयोग कर अपने नेटवर्क को संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां साइबर फोरेंसिक, वित्तीय ट्रैकिंग और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग का सहारा लेकर इन नेटवर्कों तक पहुंच रही हैं।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कई स्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की भूमिका कितनी व्यापक थी और वे किन-किन आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध से जुड़े आर्थिक स्रोतों, हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को भी समाप्त करना है। यदि जांच में और साक्ष्य मिलते हैं तो आने वाले दिनों में अतिरिक्त गिरफ्तारियां और नए आरोप भी सामने आ सकते हैं।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे। संयुक्त कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों के सुरक्षित ठिकानों, आर्थिक नेटवर्क और सहयोगियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके पास ऐसे किसी नेटवर्क से संबंधित विश्वसनीय जानकारी हो तो संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराएं।
फिलहाल गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों एवं डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।