बाबू बनारसी दास जयंती पर विराज सागर दास ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सार्वजनिक जीवन में शुचिता एवं मूल्यों की राजनीति के प्रतीक रहे बाबू बनारसी दास की जयंती के अवसर पर उनके पौत्र एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता विराज सागर दास ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में अपने दादाजी […]

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  • July 8, 2026 2:27 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सार्वजनिक जीवन में शुचिता एवं मूल्यों की राजनीति के प्रतीक रहे बाबू बनारसी दास की जयंती के अवसर पर उनके पौत्र एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता विराज सागर दास ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में अपने दादाजी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि बाबू बनारसी दास का आदर्श जीवन राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

विराज सागर दास ने अपने संदेश में लिखा कि उनके पूज्य दादाजी बाबू बनारसी दास स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, शुचिता एवं मूल्यों की राजनीति के प्रखर संवाहक तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि बाबू बनारसी दास ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित, समाज सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और जनसेवा के मार्ग पर चलने वालों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।

उन्होंने आगे कहा कि बाबू बनारसी दास का सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, ईमानदारी, नैतिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और समाज के प्रति समर्पण आज भी सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाले लोगों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक परिवेश में भी बाबू बनारसी दास के आदर्शों की प्रासंगिकता बनी हुई है और समाज को उनके विचारों से निरंतर प्रेरणा मिलती रहेगी।

विराज सागर दास ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की भावना केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे। बाबू बनारसी दास ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में यही संदेश दिया कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए। यही कारण है कि आज भी उन्हें स्वच्छ और मूल्य आधारित राजनीति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

उन्होंने अपने श्रद्धांजलि संदेश में यह भी कहा कि बाबू बनारसी दास का जीवन त्याग, सेवा, सादगी और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है। उनका संघर्षपूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदारी और जनकल्याण की भावना से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनके दादाजी के विचार और आदर्श हमेशा उन्हें जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश के साथ विराज सागर दास ने बाबू बनारसी दास का एक विशेष स्मृति पोस्टर भी साझा किया। पोस्टर में बाबू बनारसी दास की तस्वीर के साथ उन्हें जन्म जयंती पर कोटि-कोटि नमन अर्पित किया गया है। पोस्टर में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनका स्नेहिल आशीर्वाद, त्याग और जीवन मूल्य आज भी समाज के लिए प्रेरणा के प्रकाशपुंज हैं तथा उनकी पुण्य स्मृतियां सदैव सेवा और सत्कर्म के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देती रहेंगी।

गौरतलब है कि बाबू बनारसी दास उत्तर प्रदेश की राजनीति के ऐसे नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी और उसके बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके योगदान को लंबे समय से सम्मान के साथ याद किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता पर विशेष बल दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में जब सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों और पारदर्शिता की चर्चा लगातार होती रहती है, तब बाबू बनारसी दास जैसे नेताओं के विचार और कार्यशैली नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकते हैं। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि राजनीति में सेवा, समर्पण और नैतिकता का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए।

विराज सागर दास का यह श्रद्धांजलि संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने बाबू बनारसी दास को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया और कहा कि राष्ट्र निर्माण, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने और समाज हित में कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया।

बाबू बनारसी दास की जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, मूल्यों और राष्ट्र सेवा की भावना को पुनः आत्मसात करने का अवसर भी है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विराज सागर दास द्वारा व्यक्त किए गए विचार भी इसी संदेश को आगे बढ़ाते हैं कि जनसेवा, नैतिकता और राष्ट्रहित के सिद्धांत सदैव समाज के मार्गदर्शक बने रहेंगे।

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