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INS महेंद्रगिरि से बढ़ी भारत की ताकत, राजनाथ का बड़ा संदेश

नई दिल्ली। भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर दिया है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि अब तक भारत अपनी दिशा समुद्र के माध्यम से तय […]

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  • July 12, 2026 1:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर दिया है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि अब तक भारत अपनी दिशा समुद्र के माध्यम से तय करता आया है, लेकिन आने वाले समय में भारत स्वयं समुद्र की दिशा तय करने की क्षमता विकसित कर रहा है। उनका यह बयान भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत होती रणनीतिक स्थिति की ओर संकेत करता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है और हिंद महासागर विश्व की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में भारत को अपनी समुद्री सीमाओं, व्यापारिक मार्गों और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अत्याधुनिक नौसैनिक क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि INS महेंद्रगिरि केवल एक युद्धपोत नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का प्रतीक है। इस युद्धपोत का निर्माण भारत में किया गया है और इसमें अधिकांश अत्याधुनिक प्रणालियां स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई हैं। इससे न केवल भारतीय नौसेना की शक्ति बढ़ेगी बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता भी दुनिया के सामने और मजबूत होगी।

आधुनिक तकनीक से लैस है INS महेंद्रगिरि

INS महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी के स्टील्थ फ्रिगेट्स में शामिल है। इस युद्धपोत को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान बेहद कठिन हो। जहाज में आधुनिक सेंसर, लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले रडार, अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियार, हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा और उन्नत संचार प्रणाली उपलब्ध है।

यह युद्धपोत समुद्र में लंबी अवधि तक अभियान चलाने में सक्षम है और आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों तथा हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है। इसके जरिए भारतीय नौसेना ब्लू वॉटर ऑपरेशन यानी गहरे समुद्री क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति और प्रभाव बनाए रख सकेगी।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बड़ा बल

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज रक्षा उपकरणों के आयातक से निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कई आधुनिक हथियार तथा सैन्य प्लेटफॉर्म देश में ही तैयार किए जा रहे हैं।

INS महेंद्रगिरि का निर्माण इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे देश के रक्षा उद्योग, निजी कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों और हजारों इंजीनियरों एवं तकनीशियनों को रोजगार और तकनीकी अनुभव प्राप्त हुआ है। यह परियोजना भारतीय शिपबिल्डिंग क्षमता को भी नई पहचान देती है।

हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच भारत के लिए मजबूत नौसेना बेहद आवश्यक है। समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

INS महेंद्रगिरि जैसे आधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना को समुद्री निगरानी, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री डकैती रोकने और रणनीतिक अभियानों में अधिक प्रभावी बनाएंगे। इसके माध्यम से भारत अपने मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास और समुद्री सहयोग को भी मजबूत कर सकेगा।

नौसेना के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर

सरकार पिछले कुछ वर्षों से भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। नए युद्धपोत, पनडुब्बियां, विमानवाहक पोत, नौसैनिक हेलीकॉप्टर और आधुनिक हथियार प्रणालियों को तेजी से शामिल किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि भविष्य में भारतीय नौसेना पूरी तरह आधुनिक, तकनीक-सक्षम और आत्मनिर्भर बने ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की मजबूत नौसेना क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

INS महेंद्रगिरि जैसे युद्धपोत भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ विश्व मंच पर देश की रणनीतिक स्थिति को भी और सशक्त बनाएंगे। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा नीति को नई दिशा मिलेगी और वैश्विक स्तर पर उसका प्रभाव भी बढ़ेगा।

INS महेंद्रगिरि का भारतीय नौसेना में शामिल होना केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत, आधुनिक रक्षा तकनीक और मजबूत समुद्री रणनीति की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह संदेश कि “अब भारत समुद्र की दिशा तय करेगा” भारत के बढ़ते आत्मविश्वास, तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना की बढ़ती शक्ति देश की सुरक्षा, आर्थिक हितों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगी।

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