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अब इलाज होगा सस्ता! हार्ट, BP और डायबिटीज की 39 दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। आम लोगों को महंगी दवाओं से राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने हार्ट, हाई ब्लड प्रेशर (BP), डायबिटीज, विटामिन की कमी और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 39 आवश्यक दवाओं की नई अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) […]

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  • July 11, 2026 11:59 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। आम लोगों को महंगी दवाओं से राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने हार्ट, हाई ब्लड प्रेशर (BP), डायबिटीज, विटामिन की कमी और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 39 आवश्यक दवाओं की नई अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय कर दी है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से लाखों मरीजों का इलाज पहले की तुलना में अधिक किफायती होगा और स्वास्थ्य पर होने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।

NPPA द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने उत्पादों पर संशोधित MRP जल्द से जल्द अपडेट करें और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री न करें।

आम मरीजों को मिलेगी राहत

भारत में हृदय रोग, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बीमारियों के इलाज के लिए लंबे समय तक नियमित दवाओं का सेवन करना पड़ता है, जिससे मरीजों का मासिक खर्च काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार का यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जो हर महीने दवाओं पर बड़ी राशि खर्च करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की कीमतों में कमी से मरीज इलाज बीच में छोड़ने की बजाय नियमित रूप से दवाएं ले सकेंगे, जिससे बीमारी पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा।

किन दवाओं की कीमत तय हुई

NPPA की अधिसूचना के अनुसार जिन 39 आवश्यक दवाओं की कीमत तय की गई है, उनमें हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप, विटामिन की कमी, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली कई दवाएं शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर—

कैल्शियम और विटामिन D3 टैबलेट की अधिकतम कीमत 8.93 रुपये प्रति टैबलेट निर्धारित की गई है।

एंटी-रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन इंजेक्शन की कीमत 119.48 रुपये तय की गई है।

इसके अलावा सूची में शामिल अन्य दवाओं की कीमतें भी NPPA द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर ही रखी जाएंगी।

दवा कंपनियों को क्या करना होगा

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी दवा निर्माता कंपनियां निर्धारित समय के भीतर अपने उत्पादों की नई MRP पैकेजिंग पर अंकित करें। यदि किसी दवा का स्टॉक पहले से बाजार में उपलब्ध है तो उसके लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

दवा कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वितरक और खुदरा विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर दवा न बेचें।

ज्यादा कीमत वसूलने पर होगी कार्रवाई

NPPA ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी, थोक विक्रेता या मेडिकल स्टोर तय कीमत से अधिक राशि वसूलता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Drug Price Control Order (DPCO), 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर अतिरिक्त वसूली गई राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी। इसके अलावा संबंधित कंपनी या विक्रेता पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

NPPA क्या है

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority-NPPA) भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को जरूरी दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हों।

NPPA समय-समय पर आवश्यक दवाओं की सूची और उनकी अधिकतम कीमतों की समीक्षा करता है ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आवश्यक दवाओं की कीमत कम होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। भारत में बड़ी संख्या में लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा इलाज और दवाओं पर खर्च करते हैं। ऐसे में दवाओं की कीमत कम होने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जब दवाएं सस्ती होंगी तो मरीज डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार को नियमित रूप से जारी रख पाएंगे। इससे गंभीर जटिलताओं का खतरा कम होगा और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी घट सकती है।

मरीजों को क्या ध्यान रखना चाहिए

सरकार ने मरीजों से अपील की है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर अंकित MRP अवश्य जांचें। यदि कोई मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगता है तो इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों या NPPA के माध्यम से की जा सकती है।

साथ ही, मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बदलने या बंद करने से बचना चाहिए। दवा की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी गुणवत्ता में कोई कमी आई है।

सरकार का उद्देश्य

केंद्र सरकार का उद्देश्य आवश्यक दवाओं को आम नागरिकों की पहुंच में लाना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाना है। लगातार बढ़ती स्वास्थ्य लागत के बीच यह फैसला करोड़ों मरीजों के लिए राहत साबित हो सकता है। आने वाले समय में भी सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतों की समीक्षा करती रहेगी ताकि मरीजों को बेहतर और सस्ता इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

सरकार के इस निर्णय से विशेष रूप से हार्ट, BP और डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को हर महीने दवा पर होने वाले खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल मरीजों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि देश में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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