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क्या भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लगेगा सोशल मीडिया बैन?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद भारत में सोशल मीडिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। चर्चा इस बात की है कि क्या भारत भी ऑस्ट्रेलिया की तरह 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा […]

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  • July 12, 2026 6:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद भारत में सोशल मीडिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। चर्चा इस बात की है कि क्या भारत भी ऑस्ट्रेलिया की तरह 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा ऑनलाइन सुरक्षा और किशोरों की डिजिटल सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हालांकि, अभी तक भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। लेकिन केंद्र सरकार इस दिशा में विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है और संबंधित कंपनियों के साथ बातचीत भी जारी है।

ऑस्ट्रेलिया के कानून ने बढ़ाई चर्चा

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जिसने किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। वहां लागू नए प्रावधानों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को आयु सत्यापन (Age Verification) की प्रभावी व्यवस्था करनी होगी ताकि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे इन प्लेटफॉर्म का उपयोग न कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात के दौरान इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया में बच्चों और युवाओं की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और इस दिशा में किए गए प्रयास दुनिया के अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकते हैं।

भारत सरकार क्या सोच रही है?

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चर्चा कर रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेट का उपयोग सुरक्षित वातावरण में हो और बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से बचाया जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की तरह पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय एक चरणबद्ध और संतुलित व्यवस्था पर विचार कर सकता है। इसमें आयु के आधार पर अलग-अलग नियम लागू किए जा सकते हैं।

पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन हो सकती हैं पाबंदियां

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सीधे सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इनमें माता-पिता की अनुमति, आयु सत्यापन, सीमित फीचर एक्सेस, समय सीमा, संवेदनशील कंटेंट पर रोक और बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय शामिल हो सकते हैं।

सरकार इस बात पर भी विचार कर सकती है कि कम उम्र के बच्चों को केवल सीमित सुविधाओं वाले सोशल मीडिया अकाउंट उपलब्ध कराए जाएं, जबकि अधिक आयु के किशोरों को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं दी जाएं।

बच्चों की सुरक्षा क्यों बनी चिंता?

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को लेकर कई अध्ययन सामने आए हैं। इनमें बताया गया है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया पर रहने से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नींद और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अलावा साइबर बुलिंग, फर्जी खबरें, ऑनलाइन ठगी, अश्लील सामग्री, हिंसक वीडियो और डेटा गोपनीयता जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देश सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।

सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ सकती है जिम्मेदारी

यदि भारत में नया कानून लागू होता है तो सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की आयु सत्यापित करने के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसके साथ ही बच्चों के डेटा की सुरक्षा, सुरक्षित कंटेंट फिल्टर, अभिभावकों के लिए कंट्रोल सिस्टम और शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करना पड़ सकता है।

सरकार का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं बल्कि सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना है, जिससे बच्चों को इंटरनेट के सकारात्मक उपयोग का अवसर भी मिलता रहे।

क्या जल्द आएगा नया कानून?

फिलहाल सरकार की ओर से किसी नए कानून या अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया अभियान के अगले चरण में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नए नियम सामने आ सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार विभिन्न हितधारकों, तकनीकी विशेषज्ञों, सोशल मीडिया कंपनियों और बाल अधिकार संगठनों से सुझाव लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी।

अभिभावकों की भी होगी अहम भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी नियम पर्याप्त नहीं होंगे। बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता को भी जागरूक रहना होगा। बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखना, ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी लेना और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में नियमित बातचीत करना जरूरी होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑस्ट्रेलिया की ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था की सराहना के बाद भारत में सोशल मीडिया नियमन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अभी 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन का कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सरकार आयु आधारित नियमों और डिजिटल सुरक्षा के नए ढांचे पर गंभीरता से विचार कर रही है। आने वाले समय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में नए दिशा-निर्देश और कानून सामने आ सकते हैं।

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