इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में प्रस्तावित बड़े विरोध-प्रदर्शनों और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्थानीय प्रशासन ने इस्लामाबाद से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। बताया जा रहा है कि लगभग 4,000 अतिरिक्त जवानों तथा पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग को तैनात करने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए उठाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले कुछ समय से आर्थिक संकट, बिजली दरों, महंगाई और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ लोगों में असंतोष बढ़ा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) समेत कई स्थानीय संगठनों ने 15 जुलाई को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च का आह्वान किया है। इसी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक स्थानीय प्रशासन ने पाकिस्तान के गृह मंत्रालय को भेजे गए एक गोपनीय पत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तत्काल आवश्यकता जताई है। पत्र में कहा गया है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था संभावित बड़े प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। इसी कारण अतिरिक्त जवानों और रेंजर्स की सात विंग की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार हाल के सप्ताहों में JAAC के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर सहित कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी है। विपक्षी संगठनों का आरोप है कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई है।
बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय को भेजे गए पत्र पर “अति आवश्यक” और “गोपनीय” जैसी श्रेणियां अंकित हैं। इसमें प्रशासन ने दावा किया है कि यदि समय रहते पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं कराए गए तो क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है। इसी कारण केंद्र सरकार से तत्काल सहायता मांगी गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अतिरिक्त तैनाती में शामिल किए जाने वाले जवानों का एक बड़ा हिस्सा आधुनिक हथियारों और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों से लैस होगा। वहीं कुछ जवानों को भीड़ नियंत्रण के लिए दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोकना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनते जा रहे हैं। हाल के महीनों में महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं। इन आंदोलनों में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए हैं।
दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के सामने रखना चाहते हैं। हालांकि प्रशासन को आशंका है कि बड़ी भीड़ के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों को पहले से अलर्ट मोड पर रखा गया है।
क्षेत्र के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गश्त बढ़ा दी गई है। महत्वपूर्ण सरकारी भवनों, प्रशासनिक कार्यालयों और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि विरोध प्रदर्शन व्यापक स्तर पर होते हैं तो पाकिस्तान सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है। वहीं सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से क्षेत्र में तनाव का माहौल भी बना रह सकता है। फिलहाल सभी की नजरें 15 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन और प्रशासन की आगे की रणनीति पर टिकी हैं।
हालांकि इन दावों और गोपनीय दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार की ओर से भी सभी रिपोर्टों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए घटनाक्रम पर आगे आने वाले आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय सूचनाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संभावित विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति बनाए रखने पर जोर दे रहा है।