नई दिल्ली/अंबाला: शंभू बॉर्डर एक बार फिर किसानों की गतिविधियों का केंद्र बन गया है। पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए शंभू बॉर्डर पहुंचे। किसानों की इस बैठक को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क था और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई, जिससे कुछ मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार के सामने लंबित मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इसी कारण विभिन्न किसान संगठनों ने महापंचायत आयोजित कर आगे की रणनीति तय करने का फैसला लिया। बैठक में किसान नेताओं ने आंदोलन की दिशा, सरकार के साथ बातचीत और भविष्य के कार्यक्रमों पर चर्चा की।
महापंचायत के दौरान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहनों के साथ किसान सीमा क्षेत्र में पहुंचे। इससे शंभू बॉर्डर और आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव बढ़ गया। पुलिस प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की, ताकि आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
#WATCH | A large number of farmers reach Shambhu Border (Punjab-Haryana border) ahead of their scheduled march to Delhi today. Visuals from Patiala (Punjab) side. pic.twitter.com/dJtdEt0qti
— ANI (@ANI) July 21, 2026
किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें केवल कृषि से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों की आय, फसलों के उचित मूल्य, कृषि नीति और अन्य आर्थिक विषय भी उनके एजेंडे में शामिल हैं। इसके अलावा हाल के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और कृषि क्षेत्र पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर भी किसानों ने चिंता जताई। नेताओं ने कहा कि यदि सरकार किसानों की बात नहीं सुनती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसी वजह से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं।
महापंचायत के दौरान किसानों ने एकजुटता का संदेश देते हुए सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को नए चरण में ले जाने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल शंभू बॉर्डर पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी के कारण पूरे क्षेत्र पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

आने वाले दिनों में किसान संगठनों और सरकार के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर सभी की निगाहें रहेंगी। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, वहीं बातचीत विफल होने की स्थिति में किसान संगठन आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। ऐसे में शंभू बॉर्डर एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति और किसान आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।