नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, लोकसभा सचिवालय और एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित करने का फैसला किया है।
याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में छह बागी सांसदों के विलय (मर्जर) को मान्यता दी गई थी। उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि यह फैसला संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। इनमें लोकसभा स्पीकर, उनके सचिव तथा शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसद शामिल हैं। अदालत ने उनसे तय समय के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
यह मामला केवल छह सांसदों के विलय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक दलों में विभाजन, दल-बदल कानून और संसद के भीतर स्पीकर की शक्तियों जैसे संवैधानिक प्रश्न भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से दोनों गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी संघर्ष लगातार जारी है। अब इस नए घटनाक्रम ने एक बार फिर इस विवाद को न्यायिक केंद्र में ला दिया है। सभी की नजरें अब दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी।