केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों और पिछले वर्षों में उठाए गए कदमों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है और जिन चुनौतियों ने लंबे समय तक देश को प्रभावित किया, उनमें उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, उस समय देश के सामने कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियां थीं। इनमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद, नक्सलवाद तथा पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय सशस्त्र समूह प्रमुख थे। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली हिंसक घटनाओं और बम धमाकों ने भी आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की थीं। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और आंदोलनों का विषय बना हुआ था।
गृहमंत्री के मुताबिक, पिछले वर्षों में केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 के बाद वहां की स्थिति में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। उनके अनुसार, अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद अलगाववादी गतिविधियों और उससे जुड़ी मानसिकता में कमी देखने को मिली है। उन्होंने दावा किया कि आतंकवाद से जुड़े आंकड़ों में भी लगातार गिरावट आई है और क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शाह ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों के साथ सामाजिक और भावनात्मक रूप से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना नहीं रहा, बल्कि लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी रहा है। शिक्षा, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को उन्होंने क्षेत्र में बदलते माहौल से जोड़ा।
नक्सलवाद के मुद्दे पर गृह मंत्री ने कहा कि कई दशकों तक देश के सामने रही यह समस्या अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने सुरक्षा अभियानों के साथ आत्मसमर्पण, पुनर्वास और विकास योजनाओं को भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। शाह ने कहा कि जिन इलाकों को कभी लंबे समय तक हिंसा और उग्रवाद के लिए जाना जाता था, वहां अब सरकार विकास और प्रशासन की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में भी सुरक्षा और विकास की स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख किया। शाह के अनुसार, लंबे समय तक हिंसा और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों से प्रभावित रहे कई क्षेत्रों में अब शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है। केंद्र सरकार ने संवाद, समझौतों और विकास परियोजनाओं के माध्यम से अलग-अलग समूहों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश की है।
गृह मंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा केवल पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से मजबूत नहीं होती। इसके लिए बेहतर प्रशासन, रोजगार, बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा और स्थानीय लोगों का विश्वास भी जरूरी है। इसी दृष्टिकोण के तहत केंद्र सरकार ने सुरक्षा अभियानों को विकास योजनाओं के साथ आगे बढ़ाने की नीति अपनाई है।
अपने संबोधन में शाह ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों से यह संकेत मिलता है कि लगातार सुरक्षा प्रयासों और विकास की नीतियों के माध्यम से देश की कई पुरानी चुनौतियों को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत आने वाले समय में और अधिक स्थिरता, शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई व्यापक आंतरिक सुरक्षा नीति का परिणाम बताया। साथ ही यह संदेश दिया कि सुरक्षा के साथ विकास और लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना देश की दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।