गोरखपुर । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में AI डॉक्टरों की जगह ले सकता है? क्या मेडिकल रिपोर्ट देखकर AI किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की तरह सटीक इलाज बता सकता है? इन तमाम सवालों पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर की निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट और महत्वपूर्ण राय रखते हुए कहा कि AI और गूगल कभी भी मानव मस्तिष्क की जगह नहीं ले सकते। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपनी मेडिकल रिपोर्ट केवल AI पर अपलोड कर खुद डॉक्टर बनने की कोशिश न करें, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान में मानव अनुभव, नैदानिक समझ और मरीज की स्थिति का समग्र मूल्यांकन सबसे महत्वपूर्ण होता है।
यह टिप्पणी एक शिक्षा सम्मेलन के दौरान सामने आई, जहां उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में AI की भूमिका, उसकी सीमाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
AI एक सहायक है, डॉक्टर का विकल्प नहीं
डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवाओं में कई तरह से मददगार साबित हो रहा है। मेडिकल इमेजिंग, डेटा विश्लेषण, रिसर्च और शुरुआती स्क्रीनिंग जैसे क्षेत्रों में AI की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी हमेशा प्रशिक्षित डॉक्टर की ही होती है।
उन्होंने कहा कि AI लाखों मेडिकल रिकॉर्ड और शोधपत्रों का विश्लेषण कुछ ही सेकंड में कर सकता है, लेकिन मरीज की मानसिक स्थिति, शारीरिक भाषा, पारिवारिक इतिहास और कई सूक्ष्म चिकित्सकीय संकेतों को समझने की क्षमता केवल एक अनुभवी डॉक्टर के पास होती है।
सर्जरी में छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
AIIMS निदेशक ने कहा कि सर्जरी एक ऐसा क्षेत्र है जहां केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं होती। ऑपरेशन के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिनका निर्णय पल भर में लेना पड़ता है। उस समय डॉक्टर का अनुभव, निर्णय क्षमता और मानवीय समझ सबसे अधिक काम आती है।
उन्होंने कहा कि अगर ऑपरेशन के दौरान कोई अप्रत्याशित जटिलता सामने आती है तो अनुभवी सर्जन तुरंत अपनी रणनीति बदल सकता है। AI अभी उस स्तर की मानवीय समझ और निर्णय क्षमता विकसित नहीं कर पाया है।
AI पर पूरी तरह निर्भर होना खतरनाक
डॉ. दत्ता ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि इंटरनेट और AI प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए। कई लोग अपनी जांच रिपोर्ट AI टूल्स पर अपलोड कर इलाज का अनुमान लगाने लगते हैं, जो कई बार गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि हर मरीज की बीमारी, उसकी शारीरिक स्थिति, उम्र, जीवनशैली और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है। यही कारण है कि एक जैसी रिपोर्ट होने के बावजूद दो मरीजों का इलाज अलग-अलग हो सकता है।
गूगल जानकारी देता है, इलाज नहीं
उन्होंने कहा कि गूगल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों को सामान्य जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन वे किसी व्यक्ति की बीमारी का संपूर्ण मूल्यांकन नहीं कर सकते। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी कई बार अधूरी या सामान्य होती है, जबकि डॉक्टर मरीज की पूरी जांच और आवश्यक परीक्षणों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी बीमारी की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
AI का सही उपयोग जरूरी
डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि AI का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। आधुनिक तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, तेज और सुलभ बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य में AI मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान, रोगों की शुरुआती पहचान और अस्पताल प्रबंधन में बड़ी भूमिका निभाएगा। हालांकि अंतिम चिकित्सा निर्णय हमेशा मानव विशेषज्ञों द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
मानव मस्तिष्क की क्षमता अब भी सर्वोपरि
उन्होंने कहा कि मानव मस्तिष्क केवल तथ्यों का विश्लेषण नहीं करता बल्कि भावनात्मक, सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं को भी समझता है। डॉक्टर मरीज और उसके परिजनों से संवाद करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और उसी आधार पर उपचार की रणनीति तैयार करते हैं।
यही मानवीय संवेदनशीलता चिकित्सा पेशे की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे AI फिलहाल प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।
मेडिकल शिक्षा में AI की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मेडिकल शिक्षा में AI का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। मेडिकल छात्रों को कठिन विषयों को समझाने, वर्चुअल सर्जरी प्रशिक्षण, रोगों के अध्ययन और रिसर्च में AI बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
इसके अलावा अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड का बेहतर प्रबंधन, दवाओं के संभावित प्रभावों का विश्लेषण और नई दवाओं के शोध में भी AI महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि AI को एक सहायक तकनीक के रूप में अपनाना चाहिए, लेकिन इलाज और सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में डॉक्टर की भूमिका को कम नहीं आंका जा सकता। मरीजों को सोशल मीडिया, इंटरनेट या AI आधारित सुझावों के बजाय प्रमाणित चिकित्सकों की सलाह पर भरोसा करना चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और भी बढ़ेगी। लेकिन विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि AI केवल डॉक्टरों की सहायता कर सकता है, उनकी जगह नहीं ले सकता। चिकित्सा विज्ञान में अनुभव, संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय समझ आज भी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह ही रहेगी।