ओपी राजभर का दावा, 2027 से पहले बिखर चुका सपा का पीडीए समीकरण

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 28, 2026 3:31 pm IST, Published 14 minutes ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने विस्तृत संदेश में राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का बहुचर्चित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण अब पहले जैसा प्रभावी नहीं रहा है और पार्टी के सामने अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

ओम प्रकाश राजभर ने अपने संदेश की शुरुआत अखिलेश यादव को ‘मित्र’ कहकर की, लेकिन इसके बाद उन्होंने सपा की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर कई सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी की लड़ाई केवल एनडीए से नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक सामाजिक और राजनीतिक आधार को संभालने की भी है।

राजभर ने दावा किया कि उनके अनुसार जमीनी स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और जिस पीडीए रणनीति को समाजवादी पार्टी मजबूती के साथ आगे बढ़ा रही है, वह अब अपेक्षित परिणाम देने की स्थिति में नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समर्थन आधार को बनाए रखने के लिए भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

अपने बयान में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भी उल्लेख किया। राजभर का आरोप है कि दोनों नेता मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे समाजवादी पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती पैदा हो सकती है। हालांकि यह राजभर का राजनीतिक आकलन है और संबंधित दलों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी राजभर ने समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में कानून-व्यवस्था प्रभावित रहती थी और अपराध तथा माफिया गतिविधियों को बढ़ावा मिला। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-यादव पिछड़े वर्ग और बहुजन समाज के लोगों के साथ भेदभाव होने के आरोप उस समय लगातार उठते रहे।

राजभर ने अपने संदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यदि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो समाजवादी पार्टी के लिए चुनावी मुकाबला कठिन हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सपा के लिए प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका निभाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अपने संदेश के अंत में ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें जमीनी राजनीतिक परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए और अपने संगठन के भीतर की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इसे एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के बजाय “मित्र की सलाह” बताते हुए कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए प्रभावी विपक्ष भी आवश्यक होता है।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। ऐसे समय में नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक दावे लगातार सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक सक्रिय होगी तथा विभिन्न दल अपने सामाजिक समीकरणों और चुनावी रणनीतियों को मजबूत करने में जुटे रहेंगे।

 

Advertisement