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गंगा का बढ़ता जलस्तर, प्रयागराज में तटीय इलाकों के लिए प्रशासन सतर्क

प्रयागराज: प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण गंगा में पानी का प्रवाह तेज हो गया है। इसी बीच कानपुर बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाए जाने के बाद प्रशासन ने संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी […]

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  • July 28, 2026 4:03 pm IST, Published 16 minutes ago

प्रयागराज: प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण गंगा में पानी का प्रवाह तेज हो गया है। इसी बीच कानपुर बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाए जाने के बाद प्रशासन ने संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। जिला प्रशासन का अनुमान है कि बैराज से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी प्रयागराज पहुंचने के बाद जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, कानपुर बैराज से पिछले तीन दिनों में पानी छोड़े जाने की मात्रा लगातार बढ़ी है। 25 जुलाई को लगभग 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो 26 जुलाई को बढ़कर 64 हजार क्यूसेक हो गया। इसके बाद 27 जुलाई को यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.07 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। प्रशासन का मानना है कि इस अतिरिक्त पानी के प्रयागराज पहुंचने के बाद गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है।

स्थिति का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा और एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह के साथ शहर के तटीय इलाकों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए।

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब तटीय क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। सोरांव के कई गांवों, फाफामऊ के नदी किनारे स्थित मोहल्लों, फूलपुर, करछना, मेजा और हंडिया तहसील के कई गांवों में नालों के जरिए गंगा का पानी बस्तियों की ओर बढ़ने लगा है। कुछ स्थानों पर पानी आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने की भी सूचना है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि नैनी क्षेत्र में यमुना का जलस्तर भी ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है। हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

मध्य प्रदेश से आने वाली केन और बेतवा नदियों का पानी यमुना में मिल रहा है। इसके अलावा टोंस नदी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। इन तीनों नदियों के बढ़ते प्रवाह का असर आने वाले दिनों में प्रयागराज की स्थिति पर पड़ सकता है। संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को पहले से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। जिलाधिकारी ने छोटा बघाड़ा, दारागंज और गंगानगर जैसे संवेदनशील इलाकों का दौरा कर लोगों से अपील की कि वे जलस्तर बढ़ने का इंतजार न करें और समय रहते बाढ़ राहत शिविरों में पहुंच जाएं।

प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कंट्रोल रूम की जानकारी, लेखपाल और अन्य संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोग तुरंत संपर्क कर सकें। इस बार बघाड़ा क्षेत्र के लिए राहत शिविर का स्थान भी बदला गया है। पहले जहां एनी बेसेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज में शिविर बनाया जाता था, वहीं इस बार होली ट्रिनिटी स्कूल को राहत शिविर के रूप में तैयार किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर चौपाल और अन्य माध्यमों से लोगों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, सफाई और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें भी पूरी तरह सक्रिय हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और केवल प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। मौसम और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत एवं बचाव उपाय भी लागू किए जाएंगे।

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