भोपाल: मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100 प्रतिशत मूंग खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली किसानों की पदयात्रा अब राजधानी भोपाल पहुंच चुकी है। आंदोलन के तीसरे दिन और भोपाल में दूसरे दिन किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। किसानों ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात की मांग करते हुए सीएम आवास की ओर कूच करने का ऐलान किया है।
राजधानी में किसानों के पहुंचने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। होशंगाबाद रोड पर कई किलोमीटर तक बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों को वीर सावरकर सेतु के पास रोक दिया गया, जहां उन्होंने सड़क पर ही अपना डेरा डाल दिया। रातभर किसान खुले आसमान के नीचे रुके रहे और वहीं भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखा।
आंदोलन के कारण भोपाल के कई निजी और सरकारी स्कूलों ने एहतियात के तौर पर छुट्टी घोषित कर दी। वहीं होशंगाबाद रोड पर यातायात प्रभावित होने के चलते प्रशासन ने कई मार्गों का डायवर्जन लागू किया, जिससे शहर में आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना पड़ा।
किसानों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग MSP पर मूंग की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करना है। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में बड़ी संख्या में किसानों की उपज सरकारी खरीद से बाहर रह जाती है, जिससे उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक परेशानियों को दूर करने तथा समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की भी मांग की जा रही है।
इस आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम के सेठानी घाट से हुई थी, जहां किसानों ने धरना देने के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया और फिर पदयात्रा शुरू की। यात्रा सीहोर जिले के बुधनी होते हुए भोपाल पहुंची। किसानों के हाथों में तिरंगा था और वे “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए आगे बढ़े। सड़क पर रुकने के बाद भी उन्होंने धार्मिक पाठ और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखा।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी कर रखी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके पास कई दिनों तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे।
उधर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। किसानों को मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोकने के लिए विशेष सशस्त्र बल (SAF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और 20 से अधिक थानों की पुलिस को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री आवास से लगभग सात किलोमीटर पहले ही किसानों को रोक दिया गया है और लगातार अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
कृषि से जुड़े मुद्दों पर पहले भी राज्य में कई बार आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन इस बार MSP पर शत-प्रतिशत खरीद की मांग सबसे प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है। यदि सरकार और किसानों के बीच जल्द बातचीत नहीं होती है तो राजधानी में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।