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NEET विरोध में बड़ा खुलासा! 480 पाकिस्तानी हैंडल ब्लॉक

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, NEET परीक्षा पेपर लीक और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय रहे 480 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कराया गया है। […]

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  • July 24, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, NEET परीक्षा पेपर लीक और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय रहे 480 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन हैंडल्स के माध्यम से फर्जी सामग्री, एडिटेड पोस्ट और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही थीं, जिनका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और माहौल को प्रभावित करना था।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही थी। जांच में सामने आया कि कई अकाउंट्स संगठित तरीके से भारत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भ्रामक पोस्ट साझा कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि इन खातों ने NEET विवाद के अलावा अन्य राष्ट्रीय घटनाओं के दौरान भी दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश की।

डीसीपी सुमित झा ने दी जानकारी

दिल्ली पुलिस के डीसीपी सुमित झा ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में ऐसे अकाउंट सक्रिय थे, जो फर्जी सूचनाओं और अफवाहों के जरिए लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब तक 480 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई है।

डीसीपी के अनुसार, इन खातों के जरिए लगातार ऐसी सामग्री साझा की जा रही थी जिसका उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना और लोगों की भावनाओं को प्रभावित करना था। उन्होंने कहा कि साइबर विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों की मदद से इन अकाउंट्स की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की गई।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़ी सोशल मीडिया गतिविधियां

पुलिस के अनुसार, NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के समय सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में वीडियो, फोटो और संदेश वायरल किए गए। इनमें से कई पोस्ट ऐसे थे जिनकी सत्यता की पुष्टि नहीं हुई थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ विदेशी अकाउंट्स भी इस दौरान सक्रिय रहे और उन्होंने विवाद को और अधिक बढ़ाने का प्रयास किया।

अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर सामग्री सही नहीं होती। कई बार पुराने वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए पोस्ट भी तेजी से फैलाए जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

पहले भी सक्रिय रहने का दावा

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जिन सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान की गई है, उनमें से कई पहले भी भारत से जुड़े संवेदनशील मामलों के दौरान सक्रिय रहे थे। पुलिस के अनुसार, ऐसे अकाउंट्स का उद्देश्य केवल गलत जानकारी फैलाना नहीं बल्कि लोगों के बीच भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा करना भी हो सकता है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और पुलिस की ओर से जारी जानकारी के आधार पर ही यह कार्रवाई बताई गई है।

जनता से सतर्क रहने की अपील

दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली किसी भी जानकारी पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई पोस्ट, वीडियो या संदेश संदिग्ध लगे तो उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें।

पुलिस ने लोगों से कहा है कि बिना सत्यापन किसी भी सामग्री को आगे साझा करने से बचें। ऐसा करने से अफवाहों का प्रसार रुक सकता है और गलत जानकारी फैलाने वालों की कोशिशें विफल हो सकती हैं।

साइबर निगरानी पर बढ़ा जोर

हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और तथ्य-जांच की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

सरकारी एजेंसियां समय-समय पर सोशल मीडिया कंपनियों के साथ समन्वय कर आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री हटाने की प्रक्रिया भी अपनाती हैं। यदि कोई अकाउंट नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ प्लेटफॉर्म की नीति और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

फैक्ट-चेक की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल पोस्ट, वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पर वायरल होने भर से कोई जानकारी सही नहीं मानी जा सकती। आधिकारिक बयान, विश्वसनीय समाचार स्रोत और प्रमाणित फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म से जानकारी की पुष्टि करना जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार का हिस्सा है।

दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि NEET परीक्षा विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय 480 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कराया गया है। पुलिस का कहना है कि इन खातों के माध्यम से भ्रामक जानकारी और अफवाहें फैलाई जा रही थीं। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी वायरल सामग्री को बिना सत्यापन साझा न करें और केवल आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

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