नई दिल्ली। सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसी चुनौती से निपटने के लिए Meta ने एक नया AI आधारित सुरक्षा फीचर पेश किया है। इस फीचर का उद्देश्य उन किशोरों की समय रहते पहचान करना है जो ऑनलाइन बातचीत के दौरान खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-Harm) या आत्महत्या जैसे गंभीर विचारों का संकेत देते हैं। यदि Meta AI को ऐसी बातचीत के दौरान किसी तरह का जोखिम महसूस होता है, तो वह पहले संबंधित किशोर को सहायता लेने के लिए प्रेरित करेगा और जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को भी अलर्ट भेजा जा सकेगा।
Meta का कहना है कि यह फीचर खासतौर पर Teen Safety को मजबूत बनाने के लिए विकसित किया गया है। कंपनी का मानना है कि समय पर सही सहायता मिलने से कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है।
कैसे करेगा यह नया फीचर काम?
Meta के अनुसार यदि कोई किशोर Meta AI से बातचीत के दौरान ऐसे शब्दों या भावनाओं का इस्तेमाल करता है, जो मानसिक तनाव, अवसाद, आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने की ओर संकेत करते हैं, तो AI सबसे पहले उसे संवेदनशील और सहायक प्रतिक्रिया देगा। AI उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, हेल्पलाइन या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करने की सलाह देगा।
यदि किशोर का अकाउंट Meta Family Center के माध्यम से उसके माता-पिता या अभिभावकों से जुड़ा हुआ है और मामला गंभीर श्रेणी में आता है, तो सिस्टम अभिभावकों को भी सूचना भेज सकता है। इससे परिवार समय रहते बच्चे की स्थिति को समझकर आवश्यक कदम उठा सकेगा।
Teen Safety पर Meta का विशेष फोकस
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर कई देशों में चिंता जताई गई है। ऑनलाइन बुलिंग, मानसिक तनाव, आत्महत्या से जुड़ी सामग्री और खतरनाक ऑनलाइन चुनौतियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Meta पहले भी Teen Accounts, Family Center, Parental Controls, कंटेंट फिल्टर और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट जैसे कई फीचर्स लॉन्च कर चुका है। नया AI फीचर इन्हीं सुरक्षा उपायों की श्रृंखला का अगला कदम माना जा रहा है।
AI पहले करेगा मदद की कोशिश
Meta ने स्पष्ट किया है कि AI का उद्देश्य किसी की निगरानी करना नहीं बल्कि संकट की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराना है। यदि किसी किशोर की बातचीत से यह संकेत मिलता है कि वह मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो AI पहले उसे सकारात्मक बातचीत के जरिए शांत करने और सहायता लेने के लिए प्रेरित करेगा।
AI उसे यह भी सुझाव देगा कि वह किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य, शिक्षक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करे। यदि मामला अधिक गंभीर प्रतीत होता है, तभी अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
Family Center की भूमिका होगी अहम
Meta का Family Center प्लेटफॉर्म अभिभावकों को अपने बच्चों के अकाउंट की कुछ सुरक्षा सेटिंग्स देखने और नियंत्रित करने की सुविधा देता है। यदि किशोर का अकाउंट Family Center से लिंक है, तो नए फीचर के जरिए संभावित खतरे की स्थिति में पैरेंट्स तक सूचना पहुंचाई जा सकती है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि यह सुविधा केवल सुरक्षा के उद्देश्य से तैयार की गई है और इसे जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक का उपयोग सही तरीके से किया जाए तो यह संकट की स्थिति में लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकती है। कई बार किशोर अपनी भावनाएं परिवार या दोस्तों से साझा नहीं करते, लेकिन AI चैट के दौरान अपने मन की बातें लिख देते हैं। ऐसे में शुरुआती संकेतों की पहचान कर समय रहते सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि AI किसी चिकित्सक का विकल्प नहीं है, लेकिन यह शुरुआती स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने का एक उपयोगी माध्यम बन सकता है।
प्राइवेसी को लेकर भी उठ सकते हैं सवाल
नई सुविधा के साथ गोपनीयता (Privacy) को लेकर बहस भी शुरू हो सकती है। कई लोग यह सवाल उठा सकते हैं कि AI बातचीत का विश्लेषण किस सीमा तक करेगा और उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी।
Meta का कहना है कि सुरक्षा और गोपनीयता दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। कंपनी के अनुसार फीचर का उद्देश्य केवल संभावित जोखिम की पहचान करना है, न कि उपयोगकर्ताओं की निजी बातचीत की अनावश्यक निगरानी करना।
ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
डिजिटल दुनिया में किशोरों की बढ़ती भागीदारी के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी टेक कंपनियों की जिम्मेदारी बन गई है। Meta का नया AI फीचर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह तकनीक प्रभावी ढंग से काम करती है, तो मानसिक तनाव से जूझ रहे युवाओं को समय रहते सहायता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि किसी भी AI सिस्टम की सफलता उसके सही उपयोग, पारदर्शिता और उपयोगकर्ताओं के विश्वास पर निर्भर करेगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Meta का यह नया सुरक्षा फीचर वास्तविक परिस्थितियों में कितना प्रभावी साबित होता है और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को कितना मजबूत बना पाता है।