आगरा मेट्रो का ग्रीन मॉडल, बारिश का पानी बन रहा भूजल का सहारा

आगरा: भूजल सप्ताह के अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में किए जा रहे अपने प्रयासों को प्रमुखता से सामने रखा। “ग्रीन मेट्रो, क्लीन मेट्रो” विजन के तहत संस्था वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से प्राकृतिक […]

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  • July 24, 2026 5:23 pm IST, Published 1 hour ago

आगरा: भूजल सप्ताह के अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में किए जा रहे अपने प्रयासों को प्रमुखता से सामने रखा। “ग्रीन मेट्रो, क्लीन मेट्रो” विजन के तहत संस्था वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से प्राकृतिक जल संसाधनों के संरक्षण पर लगातार काम कर रही है। इन पहलों के परिणामस्वरूप हर वर्ष लगभग 62 लाख लीटर पानी का संरक्षण किया जा रहा है।

UPMRC के अनुसार लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो नेटवर्क में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। ये प्रणालियां वर्षा के पानी को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे दोबारा भूजल में पहुंचाने का कार्य भी करती हैं। इससे भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है और ताजे पानी पर निर्भरता कम हो रही है।

आगरा मेट्रो डिपो में जल संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। यहां स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और एफ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) के माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार किया जाता है। उपचारित पानी का उपयोग ट्रेनों की धुलाई, डिपो के रखरखाव और हरित क्षेत्रों की सिंचाई में किया जाता है। इस व्यवस्था से साफ पानी की खपत कम होती है और जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो रहा है।

मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के साथ जल बचत को भी प्राथमिकता दी गई है। स्टेशनों के यूरिनल में सेंसर आधारित फ्लशिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग होता है। इसके अलावा आगरा मेट्रो स्टेशनों के नलों में वाटर-एफिशिएंट फिक्स्चर लगाए गए हैं, जो प्रत्येक उपयोग पर लगभग 50 प्रतिशत तक पानी की बचत करने में सक्षम हैं।

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हरित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से UPMRC ने लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो नेटवर्क में 1.1 लाख वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में हरित परिदृश्य विकसित किया है। इन क्षेत्रों की सिंचाई के लिए उपचारित जल का उपयोग किया जाता है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

आगरा मेट्रो परियोजना में वर्षा जल संचयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मेट्रो कॉरिडोर के मीडियन और विभिन्न स्टेशनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स बनाए गए हैं। बारिश के दौरान वायाडक्ट और डिपो की छतों पर एकत्र होने वाले पानी को पाइपलाइन के माध्यम से इन पिट्स तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यह पानी जमीन के भीतर भेजा जाता है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होता है। अनुमान है कि केवल एक वर्षा ऋतु के दौरान आगरा मेट्रो की यह प्रणाली लगभग 20 लाख लीटर वर्षा जल को दोबारा जमीन में पहुंचाने में सक्षम होगी।

UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि जल संरक्षण सतत शहरी विकास की आधारशिला है। उनके अनुसार वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणालियों के जरिए संस्था पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। साथ ही यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी पूरा किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में UPMRC के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। आगरा मेट्रो के सभी स्टेशनों को IGBC प्लैटिनम ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जो ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण मानकों के पालन का प्रमाण माना जाता है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली भी टिकाऊ विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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