नई दिल्ली: देशभर में पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। कई वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठता रहा है कि क्या भारत में बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल (E0) उपलब्ध है और क्या सरकार भविष्य में इसे दोबारा आम लोगों के लिए उपलब्ध कराएगी। इन सभी सवालों पर केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट जवाब देते हुए स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने बताया कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए E0 या E10 पेट्रोल की अलग से आपूर्ति दोबारा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि कुछ प्रीमियम पेट्रोल ऐसे हैं, जिनमें एथेनॉल की मिलावट नहीं की जाती।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले कुछ प्रीमियम ग्रेड पेट्रोल पूरी तरह एथेनॉल मुक्त हैं। इनमें इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power100 तथा भारत पेट्रोलियम का Speed100 शामिल हैं। इन प्रीमियम ईंधनों में बेहतर इंजन प्रदर्शन के लिए विशेष एडिटिव्स का उपयोग किया जाता है और इनमें एथेनॉल नहीं मिलाया जाता।
प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री बेहद सीमित
सरकार के अनुसार बिना एथेनॉल वाले ये प्रीमियम पेट्रोल देशभर में उपलब्ध तो हैं, लेकिन इनकी बिक्री बहुत सीमित है। कुल पेट्रोल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी लगभग 0.5 प्रतिशत ही है। इसका अर्थ यह है कि अधिकांश वाहन चालक सामान्य E20 मिश्रित पेट्रोल का ही उपयोग कर रहे हैं, जबकि बिना एथेनॉल वाले प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल केवल चुनिंदा उपभोक्ता और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के मालिक करते हैं।
सरकार का कहना है कि इन प्रीमियम ईंधनों का उद्देश्य विशेष प्रकार के इंजनों को बेहतर प्रदर्शन देना है, न कि सामान्य पेट्रोल की जगह लेना। इसलिए इनकी उपलब्धता भी चुनिंदा पेट्रोल पंपों तक सीमित रहती है।
E20 से अधिक एथेनॉल पर अभी फैसला नहीं
लोकसभा में दिए गए जवाब में राज्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो उससे पहले व्यापक वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा।
इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों तथा संबंधित विशेषज्ञों से भी विस्तृत सलाह ली जाएगी। सरकार का कहना है कि तकनीकी रूप से सुरक्षित और व्यवहारिक होने पर ही किसी नए मिश्रण पर विचार किया जाएगा।
क्यों नहीं लौटेगा E0 और E10 पेट्रोल?
सरकार ने संसद में यह भी बताया कि E0 और E10 पेट्रोल की अलग-अलग आपूर्ति दोबारा शुरू करने के पीछे कई व्यावहारिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं। देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप संचालित होते हैं। यदि प्रत्येक पंप पर E0, E10 और E20 तीनों प्रकार के पेट्रोल की अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़े, तो परिवहन, भंडारण और वितरण की लागत में काफी वृद्धि होगी।
इसके अलावा अलग-अलग ईंधन के लिए अतिरिक्त स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। सरकार का मानना है कि ऐसी व्यवस्था फिलहाल व्यावहारिक नहीं है।
एथेनॉल मिश्रण से क्या हैं फायदे?
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है और देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी कम होता है। साथ ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलती है।
सरकार का लक्ष्य है कि देश में स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।
वाहन मालिकों की चिंताएं भी बरकरार
हालांकि एथेनॉल मिश्रण के कई फायदे बताए जाते हैं, लेकिन कुछ पुराने वाहनों के मालिक अब भी इसकी अनुकूलता को लेकर चिंता जताते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं, जबकि पुराने मॉडलों के लिए निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
ऑटोमोबाइल उद्योग लगातार ऐसे इंजन विकसित कर रहा है जो उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में E20 अनुकूल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है।
सरकार का संदेश
संसद में दिए गए जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, बल्कि वह केवल प्रीमियम श्रेणी के ईंधन के रूप में उपलब्ध है। आम उपभोक्ताओं के लिए E0 और E10 पेट्रोल की अलग आपूर्ति शुरू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। साथ ही E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य के सभी निर्णय वैज्ञानिक शोध, तकनीकी अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही लिए जाएंगे।