नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर एक साथ कई मुद्दों पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दिया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने इसे युवाओं की बड़ी जीत बताते हुए अब E20 ईंधन नीति को लेकर भी केंद्र से फैसला बदलने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के लिए “E20 के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल” आयोजित करने का ऐलान किया।
दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में केजरीवाल ने कहा कि देशभर के युवाओं ने अपने आंदोलन के जरिए यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज सरकार को निर्णय बदलने पर मजबूर कर सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जिस तरह छात्रों की भावनाओं का सम्मान किया गया, उसी तरह E20 ईंधन से जुड़ी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाए।
केजरीवाल का दावा है कि E20 ईंधन नीति के कारण बड़ी संख्या में वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की गाड़ियां प्रभावित हो रही हैं और वाहन मालिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं। उनके मुताबिक यदि समय रहते इस विषय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
इसी मुद्दे को लेकर AAP ने शनिवार को “E20 के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल” आयोजित करने की घोषणा की है। केजरीवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से उन्होंने सुबह 11:30 बजे तक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचने की अपील की, जबकि देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए ऑनलाइन जुड़ने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इच्छुक लोग व्हाट्सएप के माध्यम से पंजीकरण कर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि इस टाउनहॉल में विशेषज्ञों, वाहन मालिकों, तकनीकी जानकारों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाया जाएगा ताकि सभी पक्ष अपनी राय रख सकें। उनका कहना था कि चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी और सरकार से E20 नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिल्ली में AAP सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल और पंजाब में सरकार बनने के बाद से अब तक किसी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ। उनके अनुसार, उनकी सरकारों ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की है।
पंजाब में हाल में सामने आए परीक्षा विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे पेपर लीक के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उनके अनुसार, कुछ परीक्षा केंद्रों पर कुछ छात्र स्मार्ट पेन लेकर परीक्षा कक्ष में पहुंच गए थे। आरोप है कि इन उपकरणों की मदद से प्रश्नपत्र की तस्वीर बाहर भेजकर उत्तर प्राप्त करने की कोशिश की गई, लेकिन निगरानी व्यवस्था के कारण संबंधित छात्रों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नकल का प्रयास था, न कि पेपर लीक की घटना।
केजरीवाल ने दावा किया कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है ताकि पंजाब सरकार की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब 2022 में AAP सरकार पंजाब में सत्ता में आई थी, तब शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की स्थिति काफी पीछे थी, लेकिन अब राज्य ने उल्लेखनीय सुधार किया है। उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों को कमजोर करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
AAP प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी शिक्षा सुधार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को जनता की समस्याओं पर संवाद के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
केजरीवाल के इन बयानों के बाद E20 ईंधन नीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों ही मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। एक ओर AAP केंद्र सरकार की नीतियों को चुनौती देने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर आने वाले दिनों में प्रस्तावित नेशनल टाउनहॉल और विपक्ष की प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी।