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देवेश कुमार के इस्तीफे से दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचना लगभग तय !

पटना। बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। इस फैसले को राज्य सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को बरकरार रखने […]

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  • July 31, 2026 6:12 pm IST, Published 2 hours ago

पटना। बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। इस फैसले को राज्य सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को बरकरार रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस कदम से दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद की सदस्यता का रास्ता खुल सकता है, जिससे उनका मंत्री पद सुरक्षित रहने की संभावना बढ़ गई है।

शुक्रवार को देवेश कुमार अचानक बिहार विधान परिषद पहुंचे और सीधे सभापति के कक्ष में गए। कुछ ही देर बाद उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया कि भाजपा ने अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और उसके प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के साथ राजनीतिक समन्वय बनाते हुए यह निर्णय लिया है।

क्यों बनी थी संकट की स्थिति?

दीपक प्रकाश बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने सीमित अवधि तक ही मंत्री रह सकता है। निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी सदन की सदस्यता नहीं मिलने की स्थिति में मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। अदालत ने बिहार सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि बिना किसी सदन की सदस्यता के दूसरी बार मंत्री बनाए जाने का आधार क्या है। इसके बाद इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया।

भाजपा ने निकाला समाधान !

राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा ने अपने कोटे की एक सीट खाली करने का फैसला किया। देवेश कुमार का इस्तीफा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उनके इस्तीफे से विधान परिषद की एक सीट रिक्त हो जाएगी, जिस पर दीपक प्रकाश को नामित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

देवेश कुमार राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्यों में शामिल थे और उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक था। हालांकि उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा देकर पार्टी के फैसले को प्राथमिकता दी। अब माना जा रहा है कि रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश को सदस्य बनाया जा सकता है, जिससे उनकी मंत्री पद की संवैधानिक पात्रता बनी रहेगी। यह कदम केवल एक संवैधानिक आवश्यकता पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक तालमेल का भी संकेत है। बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रहा है। उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के महत्वपूर्ण सहयोगी नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश का पद सुरक्षित रखना गठबंधन की मजबूती के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिक्त हुई सीट पर दीपक प्रकाश की नियुक्ति कब होती है। यदि उन्हें समय रहते विधान परिषद की सदस्यता मिल जाती है तो उनका मंत्री पद सुरक्षित रहेगा। इसके बाद भविष्य में मार्च 2027 में राज्यपाल के कोटे की सीटों के पुनर्नियोजन के समय भी नई राजनीतिक संभावनाएं बन सकती हैं।

वहीं देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पार्टी भविष्य में उन्हें किसी महत्वपूर्ण दायित्व या संगठनात्मक जिम्मेदारी से नवाज सकती है। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

संवैधानिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि मंत्री पद बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। आने वाले दिनों में रिक्त सीट को भरने और दीपक प्रकाश की संभावित सदस्यता को लेकर होने वाली प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा ने त्वरित राजनीतिक निर्णय लेकर अपने सहयोगी दल के मंत्री की कुर्सी बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

 

 

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