पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक चुनावी वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा वीडियो को कथित तौर पर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार और फर्जी बताए जाने के बाद जनता दल (यूनाइटेड) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जेडीयू ने इसे मुख्यमंत्री की छवि खराब करने और मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास बताते हुए पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) नीरज कुमार ने पटना के शास्त्री नगर थाने पहुंचकर प्रशांत किशोर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस प्रमाण के मुख्यमंत्री के आधिकारिक वीडियो को फर्जी बताना न केवल भ्रामक है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश भी है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी के समर्थन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो संदेश जारी किया गया था। इस वीडियो में मुख्यमंत्री मतदाताओं से एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की अपील करते दिखाई दे रहे हैं।
बांकीपुर के सम्मानित मतदाताओं के नाम आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी का संदेश।@NitishKumar #BankipurByElection #JanataDalUnited #NDA #bihar #JDU #NitishKumar pic.twitter.com/xUVIQU9Q4x
— Janata Dal (United) (@Jduonline) July 28, 2026
वीडियो सामने आने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया और चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से उनके नाम और छवि का इस्तेमाल किया गया है।
प्रशांत किशोर के बयान के बाद जेडीयू ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना। एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाने और मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की मंशा से इस तरह के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने पुलिस से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति के पास अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण नहीं हैं, तो इस प्रकार के सार्वजनिक दावे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन बिना साक्ष्य किसी आधिकारिक वीडियो को एआई जनरेटेड बताना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनावी माहौल में भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी या एनडीए यह साबित कर दे कि वीडियो पूरी तरह वास्तविक है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी पत्रकार के सामने वही बयान दोहरा दें, तो वह बांकीपुर उपचुनाव से अपनी दावेदारी वापस लेने को तैयार हैं।
उनका कहना है कि वीडियो में दिखाया गया संदेश वास्तविक नहीं है और इसे तकनीकी माध्यम से तैयार किया गया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई तकनीकी रिपोर्ट या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पहले से ही प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के वीडियो को लेकर उठे विवाद ने चुनावी बहस को नया मोड़ दे दिया है। अब यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गया है।
यदि पुलिस शिकायत पर आगे कार्रवाई करती है, तो जांच के दौरान वीडियो की तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो वास्तविक है या उसमें किसी प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ हुई है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और चुनावी माहौल के बीच इस विवाद की दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।